– धन के लिए धर्म नहीं त्यागूंगा, छिड़ गया युद्ध तो बम-गोले भी दागूंगा : योगी
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
वाराणसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि धर्म की रक्षा के लिए आवश्यकता पड़ने पर संघर्ष के लिए भी तैयार रहना चाहिए। संन्यासी के जीवन का ध्येय धन के लिए धर्म का त्याग नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा और लोककल्याण होना चाहिए। भारत सेवाश्रम संघ ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने मूल्यों और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया है।
मुख्यमंत्री बुधवार को वाराणसी में भारत सेवाश्रम संघ की काशी शाखा के शताब्दी समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने संघ के संस्थापक स्वामी प्रणवानंद महाराज के चित्र पर पुष्प अर्पित किए और मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की। उन्होंने कहा कि वर्ष 1926 में स्थापित काशी शाखा ने सेवा और राष्ट्र जागरण की परंपरा के सौ वर्ष पूरे किए हैं। आपसी बंटवारे को देश के लिए नुकसानदेह बताते हुए योगी ने काशी विश्वनाथ मंदिर, राम जन्मभूमि और श्रीकृष्ण जन्मभूमि का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आपसी विभाजन ने विदेशी आक्रांताओं को अवसर दिया। संतों ने आध्यात्मिक साधना के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना जगाने का काम किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काशी विश्वनाथ धाम और अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण इसी चेतना का परिणाम है। योगी ने स्वामी प्रणवानंद के गोरक्षपीठ से जुड़ाव का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि उन्होंने बाबा गंभीरनाथ के सानिध्य में साधना की थी। बाद में उन्होंने आध्यात्मिक साधना को राष्ट्र जागरण का माध्यम बनाया।
मुख्यमंत्री ने संघ की सेवा गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि शताब्दी समारोह में 100 परिवारों को सिलाई मशीनें देकर आत्मनिर्भर बनाने की पहल की गई है। उन्होंने पांच परिवारों को स्वयं मशीनें वितरित कीं। कार्यक्रम में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, मंत्री रवींद्र जायसवाल समेत अनेक जनप्रतिनिधि, संन्यासी और स्वयंसेवक मौजूद रहे।