वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत को रद्द करने और मुआवजा देने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। डीएम ने हाईकोर्ट के दो सितंबर के फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। हाईकोर्ट ने आकृति की हिरासत रद्द करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया था। साथ ही यह राशि डीएम मेधा रूपम और मामले में जिम्मेदार पाए गए अन्य अधिकारियों के वेतन से वसूलने का आदेश दिया था।
आकृति चौधरी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की पीठ ने कहा था कि उपलब्ध सामग्री से यह साबित नहीं होता कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों को दंगा, आगजनी अथवा सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए उकसाया था। कोर्ट ने NSA जैसे कड़े निवारक कानून के इस्तेमाल से पहले पुलिस रिपोर्ट और संबंधित सामग्री की सावधानीपूर्वक जांच नहीं करने को लेकर गौतमबुद्ध नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई थी।
हाईकोर्ट ने NSA डोजियर तैयार करने में शामिल जिलाधिकारी और पुलिस अधिकारियों के प्रति नाराजगी को उनके सेवा रिकॉर्ड में दर्ज करने का निर्देश भी दिया था। कोर्ट ने कहा था कि निवारक हिरासत जैसे गंभीर कदम उठाने से पहले अधिकारियों को उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों की गंभीरता से जांच करनी चाहिए।
आकृति चौधरी को अप्रैल में नोएडा में श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद 13 मई को उत्तर प्रदेश पुलिस ने उनके और एक्टिविस्ट-पत्रकार सत्यम वर्मा के खिलाफ NSA लगाया था। हाईकोर्ट द्वारा NSA हिरासत रद्द किए जाने के बावजूद आकृति की तत्काल रिहाई जरूरी नहीं है, क्योंकि उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन से जुड़े अन्य आपराधिक मामले भी लंबित हैं। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि यदि किसी अन्य मामले में उनकी आवश्यकता नहीं है तो उन्हें रिहा किया जाए। अब डीएम मेधा रूपम की सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका से इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश को लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू हो गई है।