वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने गुरुवार को दो बड़े मानवीय फैसले लिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई बैठक में माध्यमिक व बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मियों को सरकारी व निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा दी गई। साथ ही पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित 99 हिंदू बंगाली परिवारों के मेरठ से कानपुर देहात में पुनर्वास को मंजूरी मिली। इन निर्णयों से लाखों लोग लाभान्वित होंगे।
वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने प्रेसवार्ता में बताया कि कैशलेस योजना से 15 लाख शिक्षक व कर्मी व उनके आश्रित लाभान्वित होंगे। इसका व्यय 448 करोड़ रुपये होगा। इलाज प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत व राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के मानकों पर होगा। स्ववित्तपोषित स्कूलों के शिक्षकों को वेरिफिकेशन के बाद लाभ मिलेगा। जिला विद्यालय निरीक्षक व बेसिक शिक्षा अधिकारी की कमेटी वेरिफाई करेगी। केंद्र या राज्य की अन्य योजनाओं से कवर लोगों को इससे बाहर रखा गया है। बैठक में 32 प्रस्तावों में से 30 को मंजूरी मिली।
कैबिनेट ने विधानमंडल के बजट सत्र को 9 फरवरी से शुरू करने का फैसला किया। 9 को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल अभिभाषण देंगी। 10 को दिवंगत सदस्यों पर शोक प्रस्ताव आएगा। 11 फरवरी सुबह 11 बजे वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश होगा। इसमें विकास, जनकल्याण, बुनियादी ढांचे व आर्थिक मजबूती पर फोकस रहेगा। सत्र की अवधि कार्यमंत्रणा समिति तय करेगी।
विस्थापित बंगाली परिवारों के पुनर्वास पर मेरठ के मवाना तहसील के नंगला गोसाई गांव में झील की भूमि पर अवैध रूप से रह रहे 99 हिंदू बंगाली परिवारों को कानपुर देहात के रसूलाबाद तहसील में बसाया जाएगा। भैंसाया गांव में 27.5097 एकड़ पर 50 परिवार व ताजपुर तरसौली में 26.009 एकड़ पर 49 परिवार बसेंगे। प्रत्येक को 0.50 एकड़ भूमि 30 वर्ष के पट्टे पर मिलेगी, जिसे 30-30 वर्ष नवीनीकृत कर 90 वर्ष तक रखा जा सकेगा। प्रीमियम या लीज रेंट पर भूमि पर्यावरण संरक्षण के साथ सम्मानजनक पुनर्वास सुनिश्चित करेगी। लंबे संघर्ष के बाद इन परिवारों को स्थायी ठिकाना मिलेगा। ये फैसले योगी सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाते हैं।