वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश को मैन्युफैक्चरिंग और निवेश का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में योगी आदित्यनाथ सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा है। सरकार का मानना है कि भरोसेमंद, सस्ती और निर्बाध बिजली आपूर्ति के बिना औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन के लक्ष्य को हासिल करना संभव नहीं है। इसी सोच के तहत प्रदेश में बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर सुधार लागू किए गए हैं।
कैबिनेट बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने प्रेस वार्ता में बताया कि औद्योगिक विकास के लिए 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार का प्रमुख लक्ष्य है। बीते वर्षों में नए पावर प्लांट की स्थापना, ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार और सब स्टेशनों के निर्माण से बिजली व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। औद्योगिक क्षेत्रों और एक्सप्रेस-वे कॉरिडोर के आसपास बिजली अवसंरचना को विशेष रूप से सुदृढ़ किया गया है, ताकि उद्योगों को निर्बाध आपूर्ति मिल सके और उत्पादन प्रभावित न हो।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 से नवंबर 2025 के बीच प्रदेश में 15,87,369 डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर स्थापित किए जा चुके हैं। इस दौरान 33/11 केवी क्षमता वाले 765 नए सब स्टेशन बनाए गए हैं और 2,455 पुराने विद्युत उपकेंद्रों की क्षमता बढ़ाई गई है। सरकार का मानना है कि कम लागत की बिजली प्रदेश की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने का अहम साधन है, जिससे उद्योग घरेलू और वैश्विक बाजार में बेहतर तरीके से प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।
ऊर्जा क्षेत्र में सुधारों का असर निवेश माहौल पर भी दिखने लगा है। मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और सर्विस सेक्टर में नए निवेश प्रस्ताव सामने आ रहे हैं। स्थिर बिजली आपूर्ति से उत्पादन की निरंतरता बनी रहती है, जिससे परियोजनाओं की समयसीमा और लागत दोनों नियंत्रित रहती हैं। इससे प्रदेश में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है।
इसी कैबिनेट बैठक में छात्रों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने के उद्देश्य से मुरादाबाद और बरेली में विज्ञान पार्क और नक्षत्रशाला की स्थापना को मंजूरी दी गई। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग लखनऊ और आगरा के बाद अब इन दोनों मंडलों में यह परियोजना शुरू कर रहा है। मुरादाबाद में दिल्ली-बरेली मार्ग पर गोविंदपुरम आवासीय योजना के अंतर्गत 4.6 एकड़ भूमि पर विज्ञान पार्क और नक्षत्रशाला स्थापित की जाएगी, जबकि बरेली में रामगंगानगर आवासीय योजना में 5.33 एकड़ भूमि पर यह केंद्र बनेगा। इन परियोजनाओं से विज्ञान शिक्षा को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ युवाओं में वैज्ञानिक सोच विकसित होने की उम्मीद है।