वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
गोरखपुर। यूजीसी के समता विनियमन 2026 को लेकर मचे विरोध पर अम्बेडकर जन मोर्चा के मुख्य संयोजक श्रवण कुमार निराला ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में बनाए जाने वाले समान अवसर केंद्र और समता समिति किसी भी तरह से न तो पुलिस थाना हैं और न ही दमन का माध्यम। किसी भी सभ्य समाज में शोषण और भेदभाव को सही नहीं ठहराया जा सकता, जबकि इस विनियमन का विरोध केवल अफवाहों के आधार पर किया जा रहा है।
श्रवण कुमार निराला ने कहा कि समान अवसर केंद्र का उद्देश्य समता को बढ़ावा देना और भेदभाव से जुड़ी शिकायतों का निस्तारण करना है। यह एक प्रशासनिक और अकादमिक व्यवस्था है, जैसी पहले से प्रॉक्टोरियल बोर्ड, आंतरिक शिकायत समिति और अनुशासन समितियां मौजूद हैं। समता समिति का अध्यक्ष स्वयं संस्थान का प्रमुख होगा और इसमें विभिन्न वर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है। इसके बावजूद यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि किसी एक वर्ग को निशाना बनाया जाएगा, जो पूरी तरह तथ्यहीन है।
उन्होंने कहा कि समिति का काम जांच करना और निष्कर्ष देना है, सजा देना नहीं। यदि कोई शिकायत गलत पाई जाती है तो उसे निर्धारित समय सीमा में खारिज करने का प्रावधान है। गंभीर मामलों में पहले की तरह पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया ही लागू होगी। समिति के निर्णय से असंतुष्ट व्यक्ति को लोकपाल में अपील का अधिकार भी दिया गया है।
श्रवण कुमार निराला ने कहा कि असल आपत्ति इस बात की है कि अब संस्थागत भेदभाव को स्वीकार कर उसके निवारण की जिम्मेदारी तय की जा रही है। समता विनियमन किसी के अधिकार नहीं छीनता, बल्कि जवाबदेही तय करता है। उन्होंने कहा कि इसे भय का मुद्दा बनाने के बजाय सामाजिक न्याय की दिशा में एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जाना चाहिए।