वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आयुष चिकित्सा पद्धतियों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करने जा रहे हैं। प्रदेश के चयनित आयुष अस्पताल अब केवल इलाज तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें रिसर्च सेंटर हब के रूप में विकसित करने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए सेंट्रल रिसर्च सेंटर के साथ एमओयू (समझौता ज्ञापन) किया जाएगा। इस पहल के तहत कैंसर, डायबिटीज, हृदय रोग सहित कई गंभीर और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों पर आयुष चिकित्सा पद्धतियों से शोध किया जाएगा।
प्रमुख सचिव आयुष रंजन कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आयुर्वेद, योग, यूनानी और होम्योपैथी को स्वास्थ्य व्यवस्था की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य आधुनिक चिकित्सा और आयुष पद्धतियों के समन्वय से इलाज को अधिक प्रभावी बनाना, रोगों की रोकथाम करना और दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुनिश्चित करना है। चयनित आयुष अस्पतालों में रोगों के कारण, प्रभाव, जीवनशैली, खानपान और आयुष आधारित उपचार पद्धतियों पर डाटा आधारित शोध किया जाएगा।
एमओयू के बाद आयुष चिकित्सकों को रिसर्च ट्रेनिंग, आधुनिक लैब सुविधाएं और तकनीकी सहयोग मिलेगा। रिसर्च का मुख्य फोकस कैंसर, डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, मोटापा, थायरॉइड, हृदय और जोड़ों के रोग, साथ ही मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर होगा। इस पहल से उत्तर प्रदेश आयुष रिसर्च के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
रिसर्च प्रोजेक्ट्स आयुष चिकित्सकों, शोधार्थियों और छात्रों को काम करने का अवसर देंगे। आयुष कॉलेजों के छात्रों को प्रैक्टिकल रिसर्च का अनुभव मिलेगा, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी। सरकार का लक्ष्य रिसर्च निष्कर्षों के आधार पर स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल तैयार करना है, जिन्हें देश-विदेश में अपनाया जा सके। इस पहल से आयुष चिकित्सा की विश्वसनीयता, प्रभाव और रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे।