वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
प्रयागराज। प्रयागराज माघ मेले में प्रशासन से हुए विवाद के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने विरोध का रुख अख्तियार कर लिया है। वह बीते एक सप्ताह से अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठे हैं और स्पष्ट कर चुके हैं कि जब तक प्रशासन सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगता, तब तक न तो वह संगम स्नान करेंगे और न ही अपने शिविर में प्रवेश करेंगे। गणतंत्र दिवस के अवसर पर 26 जनवरी को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने समर्थकों और साधु-संतों के साथ शिविर के बाहर तिरंगा फहराया और राष्ट्रगान गाया, जिससे मौके पर राष्ट्रभक्ति और विरोध का मिला-जुला संदेश देखने को मिला।
मौनी अमावस्या के दिन माघ मेला क्षेत्र में हुए विवाद के बाद से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। प्रशासन की ओर से उन्हें नोटिस भी जारी किया जा चुका है और उनके शंकराचार्य पदवी को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक रंग ले लिया है, जहां विपक्षी दल उत्तर प्रदेश सरकार पर हमलावर हैं। वहीं, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से विवाद समाप्त करने की अपील की है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया है, जिससे संत समाज की गरिमा को ठेस पहुंची है। वह लगातार सरकार के खिलाफ बयान दे रहे हैं। इस मुद्दे पर संत समाज भी दो धड़ों में बंटता नजर आ रहा है, जिससे माहौल और अधिक संवेदनशील हो गया है।
इस बीच 24 जनवरी की शाम माघ मेला क्षेत्र के सेक्टर-4 में स्थित स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर पर कथित रूप से हमला करने की कोशिश की गई। असामाजिक तत्वों द्वारा आक्रामक नारेबाजी किए जाने के बाद प्रशासन को लिखित शिकायत दी गई है। शिकायत में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और शिविर के आसपास स्थायी पुलिस बल तैनात करने की मांग की गई है। चेतावनी भी दी गई है कि भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी मेला और पुलिस प्रशासन की होगी। विवाद के बीच कांग्रेस नेता और पूर्व एमएलसी दीपक सिंह ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पत्र लिखकर उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने की पेशकश की है। उन्होंने 150 कार्यकर्ताओं को तीन शिफ्ट में तैनात करने का प्रस्ताव दिया है। फिलहाल शिविर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। आठ सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से पंडाल से लेकर पालकी और मुख्य प्रवेश द्वार तक हर गतिविधि पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।