वेब वार्ता (न्यूज एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन यानी ‘प्रगति’ केवल बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा का मंच नहीं, बल्कि नए भारत की नई कार्यसंस्कृति का सशक्त प्रतीक बन चुका है। मंगलवार को आयोजित विशेष प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने कहा कि इंटेंट, टेक्नोलॉजी और अकाउंटेबिलिटी के समन्वय से प्रगति मॉडल ठोस और समयबद्ध परिणाम सुनिश्चित कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति की अवधारणा वर्ष 2003 में गुजरात में ‘स्वागत’ मॉडल के रूप में शुरू हुई थी, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 के बाद राष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ किया। डिजिटल गवर्नेंस और कोऑपरेटिव फेडरलिज्म को मजबूती देने वाले इस प्लेटफॉर्म ने अंतर-मंत्रालयीय और अंतर-विभागीय समन्वय के जरिए जटिल समस्याओं के समाधान को आसान बनाया है। प्रगति ने शासन को फाइल-केंद्रित संस्कृति से फील्ड आधारित परिणामों की ओर अग्रसर किया है, जिससे निर्णय प्रक्रिया तेज हुई और समय व लागत की बर्बादी पर रोक लगी।
राष्ट्रीय स्तर पर इसके प्रभाव का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रगति के माध्यम से 86 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को गति मिली है। प्रधानमंत्री द्वारा प्रत्यक्ष रूप से सैकड़ों प्रमुख परियोजनाओं की समीक्षा की जाती है, जिससे शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है।
उत्तर प्रदेश के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति मॉडल राज्य के लिए गेम चेंजर साबित हुआ है। आज उत्तर प्रदेश देश का प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन बनकर उभरा है। एक्सप्रेस-वे, रेलवे नेटवर्क, मेट्रो, एयर कनेक्टिविटी, रैपिड रेल, अंतर्देशीय जलमार्ग और रोपवे जैसी परियोजनाएं समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ रही हैं। वर्तमान में प्रदेश के पास 10.48 लाख करोड़ रुपये की 330 परियोजनाओं का सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो है। इनमें से 2.37 लाख करोड़ रुपये की 128 परियोजनाएं यानी 39 प्रतिशत पूरी हो चुकी हैं, जबकि 8.11 लाख करोड़ रुपये की 202 परियोजनाएं प्रगति पर हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति पोर्टल के माध्यम से इंटर-एजेंसी बाधाओं का समाधान हुआ है और अनुमतियों व मंजूरियों की प्रक्रिया तेज हुई है। इससे उत्तर प्रदेश बॉटलनेक स्टेट से ब्रेकथ्रू स्टेट में परिवर्तित हुआ है। उन्होंने कहा कि समयबद्ध परियोजनाएं न केवल विकास को गति देती हैं, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का माध्यम भी बन रही हैं।