वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन और महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय, गोरखपुर के बीच शुक्रवार को समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। योजना भवन में आयोजित कार्यक्रम में स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज कुमार सिंह और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (वैद्य) के. राम चंद्र रेड्डी ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
समझौते का उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में रणनीतिक, तकनीकी, शैक्षणिक और अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देना है। इसके माध्यम से साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेपों के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता में सुधार किया जाएगा। विशेष रूप से मातृ मृत्यु दर, एनीमिया, कुपोषण और नवजात शिशुओं से जुड़ी जटिलताओं को कम करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। एमओयू के तहत आयुष विश्वविद्यालय तकनीकी एवं शैक्षणिक विशेषज्ञता उपलब्ध कराएगा। साथ ही संयुक्त अनुसंधान, सर्वेक्षण, साक्ष्य-आधारित सुझाव, कार्यान्वयन उपकरण तथा निगरानी एवं मूल्यांकन में सहयोग करेगा। इसके अलावा स्वास्थ्य क्षेत्र से संबंधित दिशा-निर्देश, मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी), ऑपरेशनल मैनुअल और नीति दस्तावेज तैयार करने में भी सहयोग दिया जाएगा। स्वास्थ्यकर्मियों, आयुष चिकित्सकों, फील्ड वर्कर्स और संबंधित अधिकारियों के लिए क्षमता विकास कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन प्राथमिकता वाले स्वास्थ्य क्षेत्रों की पहचान, नीतिगत मार्गदर्शन और विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय स्थापित करेगा, जबकि विश्वविद्यालय अपने शिक्षकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों की विशेषज्ञता के माध्यम से अनुसंधान, दस्तावेजीकरण और जनजागरूकता गतिविधियों में योगदान देगा। यह समझौता तीन वर्षों तक प्रभावी रहेगा। दोनों संस्थाओं ने इसे उत्तर प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार, रोकथाम योग्य मातृ मृत्यु को समाप्त करने और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य नीतियों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।