वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
वाराणसी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में 21 दिन तक चले धरने के करीब नौ महीने बाद आखिरकार एक छात्र को पीएचडी में दाखिला मिलने का रास्ता साफ हो गया है। हिंदी विभाग से जुड़े इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र भास्करादित्य त्रिपाठी को पीएचडी में प्रवेश देने का निर्णय लिया है। इसके तहत छात्र को फीस जमा करने की लिंक भी ई-मेल के माध्यम से भेज दी गई है।
यह मामला पिछले शैक्षणिक सत्र में हिंदी विभाग में अर्चिता सिंह बनाम भास्करादित्य त्रिपाठी के विवाद से जुड़ा है। ईडब्ल्यूएस श्रेणी की वेटिंग सीटों को भरने में प्राथमिकता को लेकर यह विवाद सामने आया था। अर्चिता सिंह का दावा था कि वरीयता क्रम में उनका नाम पहले है, लेकिन समय पर ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र न बन पाने के कारण स्थिति उलझ गई। इसके बाद अंडरटेकिंग देने के बावजूद भास्करादित्य त्रिपाठी को प्रवेश का लिंक भेजा गया, जिसे छात्रा के विरोध के बाद रोक दिया गया।
लिंक रोके जाने से आहत होकर भास्करादित्य त्रिपाठी 21 दिनों तक धरने पर बैठे, जिसके बाद विश्वविद्यालय में जातिवाद के आरोप भी लगे। मामले की गंभीरता को देखते हुए यूजीसी ने राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद भालेराव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की। समिति की रिपोर्ट आने के बाद कई अधिकारियों को फटकार लगाई गई और शीघ्र नामांकन के निर्देश दिए गए। अब परीक्षा नियंता कार्यालय के निर्णय के बाद भास्करादित्य त्रिपाठी को प्रवेश दिया गया है। वहीं पीड़ित छात्र, छात्र नेता डॉ. मृत्युंजय तिवारी और डॉ. नील दुबे ने जिम्मेदार प्रोफेसरों पर सख्त कार्रवाई और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।
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