वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम में अनुबंध बसों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आयशर कंपनी से हाल ही में बसें ठेके पर ली गईं, लेकिन विभागीय स्तर पर इन्हें खरीदी गई बसों के रूप में प्रस्तुत किया गया। सूत्रों के अनुसार निगम आयशर कंपनी को प्रति बस 16 रुपये प्रति किलोमीटर का भुगतान कर रहा है, जबकि कंपनी ने प्रति बस करीब पांच रुपये कमीशन भी दिया था। बसों की खराब गुणवत्ता को लेकर चालक और यात्री लगातार शिकायतें कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि 2×2 एसी बसों की सीटें कमजोर हैं और टूटने पर पीछे बैठे यात्री तक प्रभावित हो रहे हैं। इंजन की तेज आवाज भी बस के अंदर सुनाई देती है, जिससे यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है।
स्थिति यह है कि कई डिपो ऐसी बसों को वापस करने लगे हैं, जिसके बाद कंपनी और निगम के बीच विवाद बढ़ गया है। कंपनी का कहना है कि यदि बसें लौटाई जा रही हैं तो दिया गया कमीशन भी वापस किया जाए। इधर यात्रियों की शिकायत है कि बसें इतनी हल्की हैं कि चलते-चलते सड़क पर ही रुक जाती हैं।
सूत्र बताते हैं कि बलिया, मऊ, आजमगढ़, जौनपुर और अंबेडकर नगर की कई एसी बसें रोजाना शाम चार से आठ बजे तक रोक दी जाती हैं, जबकि इसी समय दिल्ली रूट पर निजी बसें चलती हैं। इसे निजी ऑपरेटरों को लाभ पहुंचाने की रणनीति बताया जा रहा है। निजी बसों के एजेंट आनंद विहार, आलमबाग, आगरा आदि बस अड्डों के बाहर ही नहीं अंदर भी सवारियां पकड़ते हुए खुलेआम देखे जा सकते है। जिससे उपस्र्टस को करोड़ों का घाटा हो रहा है। दूसरी तरफ जनरथ बसों कि भी खराब हालत है।
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