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रेसलिंग के अखाड़े से अंडरवर्ल्ड तक, बैंकॉक से डिपोर्ट होते ही गैंगस्टर हरसिमरन गिरफ्तार

वेब वार्ता(वेब वार्ता)/ अजय कुमार
दिल्ली। कुश्ती के अखाड़े से निकलकर अपराध की काली पगडंडी पर चल पड़ा कुख्यात गैंगस्टर हरसिमरन उर्फ बादल उर्फ सिमरन को दिल्ली पुलिस ने बैंकॉक से डिपोर्टेशन के बाद दिल्ली पहुंचते ही धर-दबोचा है। 38 वर्षीय आरोपी फर्जी पासपोर्ट पर देश छोड़कर भागा था और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क खड़ा करने की फिराक में सक्रिय हो चुका था। हत्या, रंगदारी, आर्म्स एक्ट और हत्या के प्रयास सहित उसके खिलाफ दिल्ली समेत देश के विभिन्न हिस्सों में 23 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। लंबे समय तक गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम देकर वह पुलिस के रडार से गायब था, लेकिन भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और थाई अधिकारियों की संयुक्त कार्रवाई ने उसकी विदेश भागने की साजिश को नाकाम कर दिया।
जांच में सामने आया कि बैंकॉक में ठहरने के दौरान उसने दुबई की यात्रा भी की, जिसके बाद मानव तस्करों के सहारे यूरोप और फिर अमेरिका तक पहुंचने के कई प्रयास किए। सबसे पहले आरोपी ने अज़रबैजान के रास्ते यूरोप में प्रवेश की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहा। इसके बाद बेलारूस–लातविया–पोलैंड रूट से यूरोप में घुसने की योजना बनाई, जहां सुरक्षा घेरे में आते ही उसे वापस भेज दिया गया। यूरोपीय सीमा से लौटने के बाद वह वीजा अवधि बढ़ाने के लिए दोबारा बैंकॉक पहुंचा, जहां भारतीय एजेंसियों द्वारा साझा किए गए इनपुट के आधार पर थाई अधिकारियों ने उसे हिरासत में ले लिया। विदेश मंत्रालय द्वारा उसके फर्जी पहचान वाले पासपोर्ट को रद्द किए जाने से डिपोर्टेशन की राह आसान बनी और थाई प्रशासन ने सभी औपचारिकताएं पूरी कर उसे भारत भेज दिया। दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरते ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू कर दी । पुलिस के मुताबिक हरसिमरन शालीमार बाग थाने का घोषित ‘बैड कैरेक्टर’ अपराधी है और दो मामलों में दोषी भी ठहराया जा चुका है। फरारी के दौरान उसने एक अहम गवाह को धमकाकर उससे 50 लाख रुपये की मांग की और अदालत में गवाही बदलने का दबाव बनाया था, जिस पर नगर थाने में अलग से केस भी दर्ज किया गया। जमानत पर छूटने के बाद वह 14 मामलों में अदालत में उपस्थित नहीं हुआ और लगातार पेशी से बचता रहा।
पुलिस ने बताया कि साल 2010 के एक हत्या कांड में आरोपी महेंद्र सिंह की गिरफ्तारी के बाद से हरसिमरन एजेंसियों की निगरानी में लगातार आ रहा था। प्राथमिक जांच में पता चला कि दिल्ली और महाराष्ट्र में सक्रिय कुश्ती खिलाड़ी रहते हुए ही वह बुराड़ी, सागरपुर और नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली के गैंगस्टरों के संपर्क में आ गया था। खेल की दुनिया में मिली शोहरत और ताकत का दुरुपयोग करते हुए उसने धीरे-धीरे रंगदारी, हथियार, धमकी और हत्या जैसी वारदातों में खुद को स्थापित कर लिया और संगठित गिरोह के रूप में सक्रियता बढ़ाई।
फिलहाल पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां उसके अंतरराष्ट्रीय कनेक्शनों, फर्जी दस्तावेज़ सिंडिकेट और संभावित आर्थिक लेन-देन की कड़ियों को खंगालने में जुटी हैं। माना जा रहा है कि पूछताछ में विदेश में बैठे आपराधिक सहयोगियों और नेटवर्क विस्तार की पूरी कहानी खुलेगी। दिल्ली पुलिस ने कहा कि डिपोर्टेशन और गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया है कि कानून से बचने की चाहे कितनी भी कोशिश हो, एजेंसियों की साझा कार्रवाई अपराधियों को आखिरकार न्याय के कठघरे तक ले ही आती है।

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