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साढ़े तीन लाख से ज्यादा लोग पुस्तक मेले से हुए रूबरू

वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के विशाल प्रांगण में 20 सितंबर से आरंभ हुआ चतुर्थ गोमती पुस्तक महोत्सव सोमवार को सम्पन्न हुआ। नौ दिनों तक चले इस आयोजन ने लखनऊ को साहित्य और संस्कृति का एक जीवंत मंच प्रदान किया। आयोजकों के अनुसार इस दौरान साढ़े तीन लाख से अधिक पुस्तक एवं साहित्य प्रेमी मेले में पहुंचे।
इस बार पुस्तक मेले में 225 से अधिक स्टॉल लगाए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है। ढाई सौ के करीब स्टॉलों पर लाखों की संख्या में पुस्तकें उपलब्ध थीं जिन्हें दर्शकों ने उत्साहपूर्वक खरीदा। पुस्तकों की बिक्री में भी इस बार 30 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे प्रकाशकों और लेखकों को उत्साह मिला। महोत्सव में 100 से अधिक साहित्यिक, सांस्कृतिक और बाल कार्यक्रम आयोजित हुए जिनमें 200 से ज्यादा लेखक, कलाकार और विशेषज्ञ शामिल हुए। इससे यह स्पष्ट हो गया कि गोमती पुस्तक महोत्सव अब लखनऊ के सांस्कृतिक परिदृश्य का एक स्थायी और महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। बच्चों, युवाओं और वरिष्ठों—सभी ने इसमें सक्रिय रूप से भाग लिया।
आयोजन ने प्रधानमंत्री की ‘नॉलेज सोसायटी’ की परिकल्पना और ‘मेक इंडिया रीड’ के मिशन को साकार करने की दिशा में ठोस कदम रखा। साथ ही, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों—मूलभूत साक्षरता, बहुभाषावाद, रचनात्मकता, समालोचनात्मक चिंतन और डिजिटल एकीकरण—को भी मूर्त रूप देने का प्रयास किया गया। यह महोत्सव मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत ‘विकसित उत्तर प्रदेश 2047’ की कल्पना को भी आगे बढ़ाता नजर आया।
समापन दिवस की शुरुआत बाल मंडप से हुई, जहां बच्चों के लिए कहानी सत्र, प्रश्नोत्तरी और रंग-बिरंगी गतिविधियों का आयोजन हुआ। प्रख्यात लेखिका नीलम राकेश ने बच्चों को कहानियों की दुनिया में रमाया। इसके बाद विवेक कुमार द्वारा आयोजित प्रश्नोत्तरी में विजेता टीम को नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया की पुस्तकें प्रदान की गईं। उन्होंने बच्चों को राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय से भी परिचित कराया। अंतिम सत्र में बुक कवर डिजाइन वर्कशॉप हुई, जिसमें बच्चों ने एनबीटी की किशोर पुस्तकों के कवर अपनी कल्पनाओं से फिर से डिजाइन किए। इसमें चयनित 10 बच्चों को विशेष पुरस्कार दिए गए। समापन के साथ ही यह स्पष्ट हुआ कि यह पुस्तक महोत्सव न केवल किताबों से जुड़ाव को मजबूत करता है बल्कि आने वाली पीढ़ियों में ज्ञान और सृजनशीलता के प्रति नई ऊर्जा भी भरता है।

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