वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। प्रदेश में किसानों की समृद्धि और जल संरक्षण के लिए ड्रिप सिंचाई प्रणाली को बढ़ावा दिया जा रहा है। उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने बताया कि ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति अपनाने से बागवानी फसलों में औसतन 50 प्रतिशत तक उत्पादन में वृद्धि हुई है। इसी प्रकार गन्ना जैसी नकदी फसलों में भी इसका लाभ दिखाई दे रहा है।
श्री सिंह ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश के 1.02 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में 82 हजार से अधिक किसानों को माइक्रो इरीगेशन के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति से लाभान्वित किया गया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अधिक से अधिक किसानों को इस योजना के लाभ, आवेदन प्रक्रिया और सिंचाई तकनीक के महत्व के बारे में समझाएं।
अपर मुख्य सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण बी.एल. मीणा ने बताया कि ड्रिप और स्प्रिंकलर पद्धति पारंपरिक सिंचाई की तुलना में 40 से 50 प्रतिशत जल की बचत करती है। यह तकनीक मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, पौधों को संतुलित पोषण देने और फसल की गुणवत्ता बढ़ाने में सहायक है। योजना के तहत अधिकतम पांच हेक्टेयर भूमि पर अनुदान मिलेगा और सात वर्षों बाद पुनः लाभ की सुविधा उपलब्ध है।
ड्रिप, मिनी और माइक्रो स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति पर लघु और सीमांत किसानों को लागत का 90 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा जबकि अन्य किसानों को 80 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। पोर्टेबल और रेनगन स्प्रिंकलर पर लघु और सीमांत किसानों को 75 प्रतिशत और अन्य किसानों को 65 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार 20 से 35 प्रतिशत अतिरिक्त टॉप अप की सुविधा भी दे रही है। इस योजना में प्राकृतिक आपदा, चोरी या आग दुर्घटना होने पर बीमा का लाभ भी मिलेगा। किसानों को आवेदन करने के लिए www.uphorticulture.gov.इन और www.upmip.in पोर्टल पर जाना होगा। योजना में 129 चयनित निर्माता फर्मों के माध्यम से किसानों को अपनी सुविधानुसार कार्य कराने की स्वतंत्रता है। इस तरह ड्रिप सिंचाई न केवल किसानों की आय बढ़ा रही है बल्कि जल संरक्षण और कृषि उत्पादन में सुधार का मार्ग भी प्रशस्त कर रही है।