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श्री हनुमानगढ़ी एक ऐसी विरासत, जिसने योद्धाभाव के साथ स्वयं को सनातन धर्म की रक्षा के लिए तत्पर किया: मुख्यमंत्री

– मुख्यमंत्री ने श्री अयोध्या धाम में श्री हनुमत् कथा मण्डपम् का लोकार्पण किया
वेब वार्ता (न्यूज एजेंसी)/ अजय कुमार
अयोध्या। श्री अयोध्या धाम में श्री हनुमत् कथा मण्डपम् के लोकार्पण पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्री हनुमानगढ़ी एक ऐसी विरासत है, जिसने योद्धाभाव के साथ स्वयं को सनातन धर्म की रक्षा के लिए तत्पर किया है। नये भारत में यह योद्धाभाव बोद्धा के रूप में सबके सामने आ गया है, जब इस श्री हनुमत् कथा मण्डपम् के भव्य स्वरूप को हम देख रहे हैं। श्री हनुमानगढ़ी अब भक्ति और शक्ति के साथ-साथ बुद्धि और युक्ति का भी संगम बन गया है। यह कथा मण्डपम् पूज्य संत बाबा अभयरामदास जी महाराज की भावनाओं का प्रतिनिधित्व कर रहा है। इस अवसर पर श्री हनुमानगढ़ी के महंत ज्ञान दास, गद्दीनषीन महन्त प्रेमदास, महन्त संजयदास (उत्तराधिकारी महंत ज्ञानदास जी महाराज) आदि ने मुख्यमंत्री को साफा बांधकर सममानित किया एवं श्री हनुमान जी का प्रतीकस्वरूप गदा भेंट किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री हनुमान जी महाराज त्रेता युग के प्राचीन टीले (हनुमानगढ़ी) में निवास कर अयोध्या धाम की रक्षा के उत्तरदायित्व का निर्वहन करते थे। पूज्य सन्त बाबा अभयरामदास जी महाराज ने वैष्णव अखाड़ों की इस जन्मभूमि पर भारत के सनातन धर्म की रक्षा के अभियान को आगे बढ़ाया। श्री हनुमान जी महाराज अयोध्या के रक्षक के रूप में हैं। यहां के इष्ट देव भगवान श्रीराम हैं। हमें स्वयं को वर्तमान के अनुसार तैयार करना होगा। दिव्य और भव्य अयोध्या के विजन को जमीनी धरातल पर उतारने में अयोध्यावासियों ने अपना भरपूर सहयोग दिया। प्रभु श्रीराम के भव्य स्वरूप को वैश्विक मंच तक पहुंचाने के अभियान के साथ हम सभी जुड़े हैं। यदि सेतुबन्ध के निर्माण में गिलहरी योगदान कर सकती है, तो हम लोग मनुष्य होकर इस पुण्य कार्य में योगदान क्यों नहीं कर सकते। अयोध्या ने दुनिया को सनातन धर्म का प्रमुख त्योहार दीपावली के रूप में दिया है। प्रभु श्रीराम द्वारा लंका विजय के उपलक्ष्य में विजयादशमी पर्व इसी अयोध्या की देन है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा अस्तित्व देश और सनातन धर्म के कारण है। हम सब कुछ स्वीकार कर सकते हैं लेकिन अपने देश और धर्म के खिलाफ कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगे। यह हमारा संकल्प होना चाहिए। श्रीरामजन्मभूमि, श्री हनुमानगढ़ी, पूज्य संतों के आश्रम, मठ-मन्दिर, पूज्य संतजन, सनातन धर्म के स्तम्भ और आधार हैं। इनका सम्मान किया जाना चाहिए। इनकी गरिमा और गौरव के विरुद्ध कोई भी आचरण स्वीकार नहीं किया जा सकता।
इस अवसर पर महंत मुरलीदास, महंत रामचरण दास, महंत संतराम दास, महंत राजेश दास, सरपंच राम कुमार दास एवं समस्त पंचांन अखाड़ा हनुमानगढ़ी अयोध्या सहित तमाम संतगण एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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