वेब वार्ता (न्यूज एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा सरस मेला का भव्य आयोजन उत्तराखंड भवन, विभूति खंड, गोमती नगर, लखनऊ में चल रहा है। 8 अप्रैल 2025 तक चलेगा, जिसमें सभी आयु वर्ग के दर्शकों के लिए अद्भुत हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों का एक बेजोड़ संग्रह प्रस्तुत किया जा रहा है।

इस मेले का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित स्थानीय और पारंपरिक उत्पादों को एक मंच पर लाना है। यहाँ उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से लेकर बिहार, उत्तराखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम और केरल जैसे राज्यों की महिलाओं द्वारा बनाए गए विशिष्ट हस्तशिल्प और परंपरागत उत्पाद प्रदर्शित किए जा रहे हैं। मेले में उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ का आँवला उत्पाद, कानपुर देहात की साड़ियाँ और सूट, गोरखपुर का टेराकोटा, उन्नाव की साड़ियाँ और सूट, और बागपत की प्रसिद्ध बेड शीट्स जैसी अनमोल कृतियाँ देखने को मिल रही हैं। इसके अलावा, बिहार से खिलौने, अचार, पापड़ और बैग, उत्तराखंड से सूत की गुड़िया, देसी गाय का घी और पहाड़ी दालें, ओडिशा से लेदर उत्पाद और हैंडीक्राफ्ट, केरल से लकड़ी के उत्पाद और साड़ियाँ, महाराष्ट्र से काजू और किशमिश, पंजाब से ज्वैलरी उत्पाद, और पश्चिम बंगाल तथा असम से रेडीमेड गारमेंट्स जैसे आकर्षक उत्पाद बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।
यह मेला केवल शॉपिंग के लिए एक बेहतरीन अवसर नहीं है, बल्कि विभिन्न राज्यों की संस्कृति, कला और हस्तशिल्प के अद्वितीय रूपों का अनुभव भी प्रदान करता है। शुक्रवार सायंकाल प्रसिद्ध गायिका सुश्री अनीता सिंह द्वारा लोकगीतों की शानदार प्रस्तुति दी गई, जिसने भारतीय लोकसंगीत की समृद्ध धारा को दर्शकों के सामने पेश किया। उनके गीतों ने वातावरण में रंग भर दिए और श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। 5 अप्रैल को, सायं प्रसिद्ध गायक मिथलेश द्वारा भजन, गजल और लोकगायन की विशेष प्रस्तुति दी थोड़ी देर में जाएगी, जो इस सांस्कृतिक महोत्सव की शोभा को और भी बढ़ाएगी। यह मेला एक सांस्कृतिक यात्रा है, जहां न केवल शॉपिंग का आनंद हैं, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और हस्तशिल्प कला की विविधता का भी अनुभव भी हैं। मेला 8 अप्रैल 2025 तक जारी रहेगा। सरस मेला शॉपिंग प्रेमियों और भारतीय सांस्कृतिक धरोहर के शौकीनों के लिए एक अभूतपूर्व अवसर है।