वेब वार्ता (न्यूज एजेंसी)/ अजय कुमार वर्मा
लखनऊ। यूपी के संभल में हिंसा की आग अब बुझ गई है, लेकिन उसके निशान बाकी रह गए हैं। किसी का घर उजड़ गया तो किसी का परिवार। हिंसा में 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हैं। यहां जाने पर अड़े समाजवादी प्रतिनिधिमंडल के नेताओं को जगह-जगह पर रोक दिया गया। प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई करने वाले माता प्रसाद पांडे को उनके लखनऊ वाले घर पर ही रोका गया। वहीं सांसद जिया-उर-रहमान बर्क और हरेंद्र मलिक को गाजियाबाद बॉर्डर में घुसने नहीं दिया गया।
बता दें कि संभल हिंसा पर सियासत गरमाई हुई है। समाजवादी पार्टी के संभल सांसद समेत कई विधायक आज संभल जाने वाले थे, लेकिन उन्हें प्रवेश करने से रोक दिया गया, क्योंकि प्रशासन ने शनिवार को शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए बाहरी लोगों और जनप्रतिनिधियों के संभल में प्रवेश पर प्रतिबंध को 10 दिसंबर तक बढ़ा दिया है। बाहरी लोगों के प्रवेश पर पहले लगाई गई रोक शनिवार को समाप्त हो रही थी। मुजफ्फरनगर सांसद हरेंद्र मलिक ने रोके जाने पर कहा कि पूछा कि मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि हमें क्यों रोका जा रहा है, क्या विपक्षी नेता और सांसद इतने गैरजिम्मेदार हैं कि उन्हें राज्य के भीतर जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती?
सपा के सांसद हरेंद्र सिंह मलिक और जिया उर्र रहमान बर्क को पुलिस ने रोक दिया है। इस मामले में डीसीपी निमिश पाटिल ने बताया कि इस पूरी कार्रवाई के पीछे कुछ वजहें जो हैं, उनको देखते हुए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने यह भी साफ किया है कि आगे पुलिस किस तरह की कार्रवाई करने वाली है।
संभल हिंसा के मामले में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधा उनका दावा है कि यह दंगा सरकार ने कराया है। उन्होंने यह भी कहा कि इसका वीडियो सबूत मौजूद है। उन्होंने यह भी बताया कि जब उन्होंने चुनाव आयोग को शिकायत की तो चुनाव आयोग ने कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की।
पुलिस हम पर 10 संदिग्धों के नाम लेने का दबाव बना रही :
वहीं दूसरी तरफ घायलों के परिवार वालों का कुछ और ही कहना है। घायल हसन की बहन आशिया ने कहा कि हम पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है, मेरे पिता की नवंबर में मौत हो गई थी और भाई हसन को हिरासत में रखा गया है। डॉक्टरों ने कहा था कि उसके हाथ की सर्जरी जरूरी है, नहीं तो हाथ काम करना बंद कर देग। उसे पहले संभल अस्पताल ले जाया गया, और बाद में मुरादाबाद रेफर कर दिया गया।