वेब वार्ता (न्यूज एजेंसी)/ अजय कुमार वर्मा
वाराणसी। प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में आज सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी का 42वां दीक्षान्त समारोह सम्पन्न हुआ। राज्यपाल ने दीक्षान्त समारोह में विभिन्न संकायों के कुल 13,733 छात्रों को स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी. उपाधियाँ प्रदान कीं। उन्होंने उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए 31 छात्रों को कुल 56 स्वर्ण पदक प्रदान किया, जिसमें 23 छात्र एवं 8 छात्राएं रहीं।
राज्यपाल ने छात्र-छात्राओं को बधाई दी तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उपाधि प्राप्ति केवल एक शैक्षिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का भी प्रतीक है। उन्होंने छात्रों को जीवन में कर्तव्यनिष्ठा का पालन करने की प्रेरणा दी। राज्यपाल जी ने संस्कृत शिक्षा की प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए कहा कि सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय प्राचीन भारत की सांस्कृतिक और शैक्षिक धरोहर को जीवंत रखने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि संस्कृति की विरासत संस्कृत भाषा में संचित और संरक्षित है। इसीलिए संस्कृत भाषा में उपलब्ध सांस्कृतिक चेतना का प्रसार करना राष्ट्र सेवा है। उन्होंने कहा कि भारत के प्रतिष्ठा के दो स्तम्भ हैं। प्रथम संस्कृत व द्वितीय संस्कृति। संस्कृत भाषा देववाणी है तो देशवाणी भी है।
राज्यपाल ने सरस्वती भवन पुस्तकालय में संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों के बारे में बताया कि इनमें अनमोल ज्ञानराशि निहित है। उसके संरक्षण का कार्य भी भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन के द्वारा बहुत सुन्दर प्रयास के साथ किया जा रहा है, जिसको और अधिक गति देने के लिए राज्यपाल जी ने कम्प्यूटरीकरण करने का भी निर्देश दिया और कहा कि इन पाण्डुलिपियों का प्रकाशन कराकर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।