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सरकारी नौकरी लगवाने का झाँसा देकर ठगी करने वाले गिरफ्तार

वेबवार्ता (न्यूज एजेंसी)/ अजय कुमार वर्मा
लखनऊ। सरकारी संस्था के नाम पर ऑफिस खोलकर सरकारी नौकरी लगवाने का झाँसा देकर भोले-भाले नवयुवको से लाखो की ठगी करने वाले संगठित गिरोह का सरगना व उसका साथी गिरफ्तार।
दिनांक 26-01-2024 को एस0टी0एफ0, उ0प्र0 को जनपद लखनऊ में सरकारी संस्था के नाम पर ऑफिस खोलकर सरकारी नौकरी लगवाने का झाँसा देकर भोले-भाले नवयुवको से लाखो की ठगी करने वाले संगठित गिरोह का सरगना भानु प्रताप सिंह व उसका साथी सतेंद्र कुमार पाठक को दुर्गा टावर के पास विभूति खण्ड से गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार अभियुक्त: भानु प्रताप सिंह पुत्र पारस नाथ सिंह नि0-रिश्ता अपार्टमेंट ए-1 702, गोमती नगर विस्तार, लखनऊ मूल निवासी-ग्राम पकड़ी बुजुर्ग, थाना घोसी, जनपद मऊ व सतेंद्र कुमार पाठक पुत्र वी0पी0 पाठक नि0-ग्राम सराये पटखनी, थाना गोपीगंज, जनपद भदोही। वर्त्मान पता-1180ध्21 इंदिरानगर, लखनऊ।
बरामदगी: पांच मोबाइल, दो कार, 100 ग्राम विकास सहकारी समिति से सम्बन्धित आवेदन पत्र की प्रति, एक फर्जी सिम कार्ड, पांच फर्जी विभिन्न विभागों के ज्वाइनिंग लेटर, अभ्यर्थियों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों की फोटो प्रति, विभिन्न सरकारी परीक्षाओ के एडमिट कार्ड, विभिन्न सरकारी व संविदा नौकरियों के विज्ञापन सम्बन्धी फर्जी प्रपत्र, पांच हस्ताक्षरित ब्लेंक चेक।
एस0टी0एफ0, उत्तर प्रदेश को विगत काफी दिनों जनपद लखनऊ में भोले-भाले बेरोजगार नवयुवको बहला फुसलाकर सरकारी नौकरी देने के नाम पर धन उगाही व फ्रॉड करने वाले गिरोहों के सम्बन्ध में सूचनाएं प्राप्त हो रही थी। इस सम्बन्ध में एस0टी0एफ0 के निरीक्षक राघवेंद्र सिंह ने सूचनाओं और सर्विलांस की मदद से विभूति खण्ड दुर्गा टावर के पास एक बिलिं्डग मे ग्राम विकास कृषि सहकारी समिति लिमिटेड लखनऊ(उ०प्र०) लिखा दिखाई दिया तथा नीचे एक काले रंग की हौंडा सिटी कार यूपी 32 एचएल 2496 व एक महिंद्रा एक्सयूवी 500 यूपी 32 जीजे 6002 खड़ी थी। द्वितीय तल पर जाने पर दफ्तर के बाहर ग्राम विकास कृषि सहकारी समिति लिमिटेड लखनऊ(उ०प्र०) का बोर्ड लगा था। अन्दर जाने पर दो व्यक्ति बैठे थे जिनका नाम भानु प्रताप सिंह पुत्र पारस नाथ सिंह निवासी उपरोक्त व सतेंद्र कुमार पाठक निवासी उपरोक्त मिले, जिनसे ऑफिस के संबन्ध मे जानकारी की गयी तो ऑफिस को अपना बताया गया। सामने मेज पर एक अदद फाइल जिस पर जिला सेवायोजन कार्यालय पीलीभीत लिखा था तथा उ0प्र0 सरकार का मोनोग्राम बना है। फाइल के अंदर फ्रॉड करने के उद्देश्य से कई फर्जी व कूट रचित दस्तावेज रखे हुए थे, जिसकी स्वीकारोक्ति दोनांे अभियुक्तो द्वारा की गयी, जिसपर इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया, जिनके पास से काफी फर्जी दस्तावेज बरामद हुए। यह लोग पूर्व में भी शहर में कई जगहों पर दफ्तर खोल कर भोले-भाले नवयुको से फ्रॉड की घटनाये कर चुके है।
यह उच्चाधिकारी बन कर साक्षात्कार करते थे। और जो नौकरी देने के नाम पर पैसा देता था। भानु दीक्षित पहले भी कई बार ऐसे ही मामलो मे जेल जा चुका है।

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