वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की क्षमता विकास के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने देशभर में पहला स्थान हासिल किया है। मिशन कर्मयोगी के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया। राजस्थान दूसरे और जम्मू-कश्मीर तीसरे स्थान पर रहा। खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश के गृह विभाग ने अकेले एक करोड़ से अधिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे कर उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है।
डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (रुपाम) और भारत सरकार के क्षमता विकास आयोग की ओर से आयोजित उत्तरी क्षेत्रीय कार्यशाला में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले राज्यों और विभागों को सम्मानित किया। उत्तर प्रदेश की इस उपलब्धि को प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और सरकारी सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रदेश में आईजीओटी कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर करीब 19.23 लाख उपयोगकर्ता पंजीकृत हैं। इनमें 99 प्रतिशत से अधिक सक्रिय हैं। इसके अलावा उन्नति पहल के तहत 350 से अधिक प्रशिक्षण संस्थानों का पंजीकरण किया गया है। साधना सप्ताह और सात दिवसीय क्षमता विकास कार्यक्रम के जरिए भी अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया। विभागीय प्रदर्शन में गृह विभाग ने श्रेणी ‘क’ में पहला स्थान हासिल किया। बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग को दूसरा पुरस्कार मिला। दोनों विभागों ने एक-एक करोड़ से अधिक पाठ्यक्रम पूरे किए हैं। उच्च शिक्षा विभाग को श्रेणी ‘ख’ में पहला और अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग को दूसरा स्थान मिला। श्रेणी ‘ग’ में हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग पहले और प्रशासनिक सुधार विभाग दूसरे स्थान पर रहा।
कार्यक्रम में उन्नति कैपेबिलिटी इंडेक्स और नेशनल करिकुलम डिजाइन फ्रेमवर्क की शुरुआत भी की गई। इनके माध्यम से प्रशिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता का नियमित मूल्यांकन होगा और अधिकारियों की जिम्मेदारियों के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार किए जा सकेंगे। सरकार का लक्ष्य प्रशिक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाकर प्रशासनिक कार्यक्षमता और जनसेवा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार करना है।