वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को लीजहोल्ड संपत्तियों को फ्रीहोल्ड में बदलने के लंबित 1,373 आवेदनों पर दो महीने के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इन आवेदनों का निपटारा उस समय लागू नीति के तहत किया जाए। वहीं, भविष्य में आने वाले आवेदनों के लिए आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MOHUA) और डीडीए नई नीति तैयार कर सकते हैं।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की पीठ ने कहा कि स्थिति इसलिए गंभीर है क्योंकि कई संपत्ति मालिक आवेदन करने के साथ उस समय लागू कन्वर्जन शुल्क भी जमा कर चुके हैं, लेकिन अब तक डीडीए के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। अदालत ने कहा कि इस देरी से दिल्ली के निवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पीठ ने बताया कि वर्ष 2020 से 2026 के बीच फ्रीहोल्ड के लिए किए गए 1,373 आवेदन लंबित हैं। डीडीए इन आवेदकों से 155.06 करोड़ रुपये कन्वर्जन शुल्क के रूप में पहले ही वसूल चुका है। इनमें 308 आवेदन ऐसे हैं, जिन्हें मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन उनके कन्वेयंस डीड अब तक निष्पादित नहीं किए गए हैं।
अदालत डीडीए की ओर से आवेदनों पर कार्रवाई नहीं किए जाने से परेशान संपत्ति मालिकों की याचिकाओं के समूह पर सुनवाई कर रही है। पीठ ने संबंधित अधिकारियों को भविष्य की नीति पर भी काम करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 11 दिसंबर को होगी। उस दिन एमओएचयूए के सचिव और डीडीए के उपाध्यक्ष को कार्यवाही में शामिल होने का निर्देश दिया गया है।
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