वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत श्रमिकों को अब मजदूरी का भुगतान पूरी पारदर्शिता के साथ सीधे उनके बैंक खातों में किया जा रहा है। यह व्यवस्था उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देशों के क्रम में शुरू की गई है, जिसके तहत मनरेगा जॉब कार्ड को श्रमिकों के आधार से लिंक कर दिया गया है।
सरकार का उद्देश्य मनरेगा में किसी भी प्रकार की धांधली की गुंजाइश को समाप्त करना और श्रमिकों को उनकी मेहनत का वाजिब पारिश्रमिक समय पर प्रदान करना है। आधार लिंकिंग से न केवल श्रमिक की पहचान की प्रमाणिकता सुनिश्चित होती है, बल्कि भुगतान प्रक्रिया में भी पूर्ण पारदर्शिता आती है। अब मजदूरों को भुगतान के लिए इधर-उधर भटकने की आवश्यकता नहीं पड़ती और उनकी मजदूरी सीधे आधार आधारित भुगतान प्रणाली (एबीपीएस) के माध्यम से उनके खाते में पहुंच जाती है।
सरकार की इस पहल के तहत प्रदेश के सभी रोजगार सेवकों और ग्राम पंचायत अधिकारियों को निर्देशित किया गया था कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सभी सक्रिय श्रमिकों के जॉब कार्ड को उनके आधार नंबर से लिंक कराना सुनिश्चित करें। इस अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। ग्राम्य विकास विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश भर में मनरेगा के अंतर्गत 2.30 करोड़ से अधिक श्रमिक पंजीकृत हैं, जिनमें से लगभग 2.23 करोड़ श्रमिकों के जॉब कार्ड पहले ही आधार से लिंक किए जा चुके हैं। यह आंकड़ा 96.95 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। वहीं प्रदेश में 1.18 करोड़ सक्रिय श्रमिकों में से 99.97 प्रतिशत श्रमिकों के जॉब कार्ड को आधार से जोड़ा जा चुका है।
सरकार का मानना है कि बार-बार बैंक खाता संख्या बदलने और उसे समय पर अपडेट न किए जाने से भुगतान प्रक्रिया में बाधाएं उत्पन्न होती थीं। आधार आधारित भुगतान प्रणाली इस समस्या का स्थायी समाधान है। इस नई व्यवस्था से मनरेगा में कार्यरत श्रमिकों को न केवल समय पर भुगतान सुनिश्चित हो रहा है, बल्कि तकनीक के बेहतर उपयोग से योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ी है।
राज्य सरकार की इस पहल को मनरेगा के क्रियान्वयन में एक अहम सुधार के रूप में देखा जा रहा है, जिससे श्रमिकों को सीधा लाभ मिल रहा है और सरकार की गरीबों के उत्थान की मंशा को बल मिल रहा है।