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उत्तर प्रदेश बना खाद्य प्रसंस्करण का हब, किसानों को मिल रहा सीधा लाभ

वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश देश के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। प्रदेश में सबसे अधिक खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित हैं, जिनके माध्यम से न केवल किसानों की आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़ रहे हैं।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने लखनऊ में आयोजित बैठक के दौरान मुख्य विकास अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएम एफएमई) एवं उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण नीति-2023 के क्रियान्वयन में पूरी सजगता और तत्परता बरती जाए। उन्होंने इन योजनाओं को प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने में सहायक बताया।
बैठक में अपर मुख्य सचिव (खाद्य एवं प्रसंस्करण) बी.एल. मीणा ने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश में लगभग 65,000 खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां कार्यरत हैं, जिनमें से 3.5 लाख इकाइयां असंगठित क्षेत्र (एमएसएमई) की हैं। राज्य में 2800 इकाइयों का टर्नओवर लगभग 500 करोड़ रुपये है। पीएम एफएमई योजना के तहत इस वर्ष उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक प्रस्ताव स्वीकृत हुए हैं और योजना का स्ट्राइक रेट 98 प्रतिशत है, जो कि देश में सबसे अधिक है। अब तक 17,900 से अधिक इकाइयों को अनुदान स्वीकृत किया जा चुका है, जिससे 4.60 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त हुआ है। खाद्य प्रसंस्करण नीति-2023 के अंतर्गत फल एवं सब्जी प्रसंस्करण, दुग्ध प्रसंस्करण, रेडी टू ईट, रेडी टू सर्व, मसाला प्रसंस्करण, राइस ब्रान ऑयल, कोल्ड चेन, मल्टीग्रेन फ्लोर, सोलर पावर और रिफर वाहनों से जुड़ी कुल 309 इकाइयों को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी किए गए हैं।
प्रदेश के 62 जनपदों में परियोजनाओं की स्थापना हेतु स्वीकृति मिल चुकी है। इसके अतिरिक्त, 17 जनपदों की 17 इकाइयों को अब तक फायर एनओसी प्राप्त नहीं हुई है, वहीं 13 इकाइयों को प्रदूषण एनओसी की प्रतीक्षा है। उप मुख्यमंत्री ने इस पर चिंता जताते हुए निर्देश दिए कि संबंधित जिलों के अधिकारी अनापत्ति प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में तेजी लाएं। उन्होंने सभी जनपदों को निर्देशित किया कि नवाचार आधारित खाद्य प्रसंस्करण परियोजनाएं तैयार कर पोर्टल पर अपलोड करें और थर्ड पार्टी निरीक्षण एजेंसियों से समन्वय बनाकर कार्यवाही सुनिश्चित करें।
प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक किसानों को इन योजनाओं से जोड़कर उन्हें लाभान्वित किया जाए और प्रदेश को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में देश का अग्रणी राज्य बनाया जाए।

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