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जानकी महल में पांच किलो सोने के आभूषण धारण करेंगे सीताराम

वेब वार्ता (न्यूज एजेंसी)/ अजय कुमार वर्मा
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में श्रीराम विवाहोत्सव का रंग चटख हो गया है। रामनगरी के मंदिरों में राम विवाहोत्सव की परंपरा पूरे भव्यता के साथ निभाई जाती है। माता जानकी का मायका कहे जाने वाले जानकी महल की तैयारियां उत्सव की भव्यता दर्शा रही हैं। जानकी महल में राम विवाह पर विराजमान भगवान श्रीसीताराम के विग्रह को पांच किलो सोने से निर्मित आभूषण धारण कराए जाएंगे। साथ ही बरात में लखनऊ की शहनाई गूजेंगी, राजस्थान का डांस ग्रुप व भगवान के स्वरूप आकर्षण का केंद्र होंगे।
    रामजन्म भूमि में भगवान रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहली बार श्रीराम विवाह का उत्सव धूमधाम से मनाने की तैयारी है। राम नगरी के अलग-अलग मंदिरों से छह दिसंबर को राम बरात निकाली जाएगी। श्रीसीता-राम विवाहोत्सव का मुख्य उत्सव छह दिसंबर को है। रामनगरी के चुनिंदा मंदिरों में राम विवाहोत्सव पूरे भाव-चाव से मनाया जाता है। रामनगरी के श्री जानकी महल ट्रस्ट में मिथिला पद्धति से विवाहोत्सव मनाया जाता है। यहां पर भगवान राम को दुल्हा सरकार और किशोरी जी को बेटी माना जाता है। इस बार जानकी महल में उत्सव और भी खास होने जा रहा है।
   जानकी महल के ट्रस्टी आदित्य सुल्तानिया बताते हैं कि दिल्ली की मशहूर रामलीला जो प्राण प्रतिष्ठा के समय रामलला के सम्मुख लीला कर चुकी है। उसी लीला मंडली के 40 कलाकार चार दिनों तक रामलीला का मंचन करेंगे। दूल्हा सरकार व किशोरी जी के लिए पांच किलो सोने से निर्मित आभूषण जैसे मुकुट, हार, कर्धन आदि बनवाए गए हैं, जो उन्हें धारण कराए जाएंगे। आदित्य ने बताया कि बरात में छह बग्घी, ऊंट, घोड़े, लखनऊ की शहनाई, दिल्ली की लाइटिंग आकर्षण का केंद्र होगी। इसके अलावा बरात में विभिन्न प्रांतों के करीब एक हजार लोग शामिल होंगे। राधा, कृष्ण, शंकर पार्वती व हनुमान के स्वरूप भी आकर्षण बढ़ाएंगे। झारखंड व राजस्थान के कलाकार प्रस्तुति देंगे। बनारस का काशी चाट भंडार इस बार भगवान राम की बरातियों की सेवा में शामिल होगा। साथ ही कलकत्ता के चाय, टोस्ट का लुत्फ भी बराती उठाएंगे। वर पक्ष की अगुवाई दिल्ली के मुरारी लाल अग्रवाल करेंगे तो वधू पक्ष जानकी महल ट्रस्ट दुल्हा सरकार व बरातियों की सेवा करेगा। वहीं करीब एक हजार लोगों को वस्त्र, कंबल, राशन व ऊनी कपड़े भेंट किए जाएंगे। उत्सव का आगाज तीन दिसंबर को रामार्चा महायज्ञ, रामलीला और गणेश पूजन से होगा। चार को फुलवारी लीला होगी। आदित्य सुल्तानिया के अनुसार राम विवाहोत्सव के दौरान जानकीमहल में फुलवारी की प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र होती है। जानकीमहल के मुख्य आगार के सम्मुख स्थापित मनोहारी फुलवारी को जनकपुर की उस फुलवारी के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। जहां त्रेता में श्रीराम और सीता का पहली बार आमना-सामना हुआ था। इस मौके पर रामनगरी के प्रतिनिधि चुनिंदा संत-धर्माचार्य भी आमंत्रित होते हैं जो श्रीराम के प्रसंग का आस्वाद ही नहीं लेते बल्कि अपनी वेश-भूषा और ध्यानियों जैसी भाव-भंगिमा से श्रीराम के गुरु और संरक्षक- मार्गदर्शक के रूप में ऋषि विश्वामित्र की याद भी दिलाते हैं।

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