वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। आपराधिक न्याय प्रणाली को तकनीक आधारित, समन्वित और अधिक प्रभावी बनाने के लिए इंटीग्रेटेड क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) 2.0 परियोजना के क्रियान्वयन की सोमवार को समीक्षा की गई। मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में गठित स्टेट एपेक्स कमेटी की बैठक में परियोजना की प्रगति, तकनीकी जरूरतों, विभागीय समन्वय और आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्य सचिव ने कहा कि ICJS 2.0 आपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत और पारदर्शी बनाने की महत्वपूर्ण पहल है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन से आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े विभिन्न विभागों के बीच सूचनाओं का बेहतर आदान-प्रदान होगा, जिसका लाभ आमजन के साथ न्यायिक तंत्र को भी मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने और परियोजना में आने वाली बाधाओं का तत्काल समाधान कर कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरा कराने के निर्देश दिए।
बैठक में ICJS 2.0 डैशबोर्ड पर प्रदेश के स्कोर कार्ड और प्रगति की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि डैशबोर्ड पर उपलब्ध आंकड़ों और विभिन्न मानकों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। जिन क्षेत्रों में प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं है, वहां ठोस कार्ययोजना बनाकर लगातार सुधार सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने ICJS के मूल सिद्धांत ‘वन डाटा, वन एंट्री’ को प्रभावी बनाने पर जोर दिया। कहा कि एक बार दर्ज सूचना संबंधित सभी स्तंभों के साथ साझा हो, इसके लिए पोर्टल को आवश्यकतानुसार तकनीकी रूप से अपडेट कराया जाए। एनआइसी के माध्यम से जरूरी संशोधन शीघ्र कराने और मैनुअल कार्य कम करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने विभागों को टीम भावना से कार्य करने और नियमित समीक्षा के साथ शेष उपकरणों की खरीद प्रक्रिया भी जल्द पूरी करने को कहा। बैठक में डीजीपी राजीव कृष्णा, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री, गृह एवं सूचना संजय प्रसाद समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।