वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (RMLIMS) के क्लिनिकल हेमेटोलॉजी विभाग की ओर से पीआइसीसी (Peripherally Inserted Central Catheter) लाइन के सुरक्षित उपयोग, प्रक्रिया और प्रबंधन को लेकर विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ को पीआइसीसी लाइन के प्रभावी एवं सुरक्षित इस्तेमाल के साथ मरीजों की बेहतर देखभाल के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण देना रहा।
कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह और डीन डॉ. प्रद्युम्न सिंह मौजूद रहे। डॉ. अरविंद, एमएस ने विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। कार्यशाला में डॉ. तुषांत और डॉ. अभिनव चौहान ने गेस्ट फैकल्टी के रूप में पीआइसीसी लाइन से जुड़ी तकनीकी एवं व्यावहारिक जानकारी साझा की।
विशेषज्ञों ने पीआइसीसी लाइन के संकेत एवं उपयोग, मरीज के चयन, सुरक्षित इंसर्शन तकनीक, संक्रमण की रोकथाम, कैथेटर की देखभाल और संभावित जटिलताओं के प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दी। प्रतिभागियों को हैंड्स-ऑन डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से प्रक्रिया को समझने और अपने कौशल को बेहतर करने का अवसर मिला। कार्यशाला का नेतृत्व हेमेटोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. नम्रता अवस्थी ने किया। आयोजन और समन्वय में डॉ. पूर्वी कपूर और डॉ. अल्पिका शुक्ला की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यशाला में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इंटरैक्टिव सत्रों में विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के सवालों का समाधान भी किया।
डॉ. नम्रता अवस्थी ने कहा कि कौशल आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम स्वास्थ्यकर्मियों की दक्षता बढ़ाने के साथ मरीजों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि पीआइसीसी लाइन जैसी प्रक्रियाओं में तकनीकी दक्षता और संक्रमण नियंत्रण बेहद महत्वपूर्ण है।
कार्यशाला के समापन पर अतिथियों, गेस्ट फैकल्टी और सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।