वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अब प्रदेश का घुमंतू समाज दर-दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर नहीं होगा। डबल इंजन सरकार उन्हें सम्मानजनक जीवन, शासन की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ और समग्र विकास सुनिश्चित करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा गठित घुमंतू विकास बोर्ड वर्षों से उपेक्षित विमुक्त एवं घुमंतू समुदायों को न्याय, सम्मान और अवसर दिलाने का सशक्त माध्यम बनेगा।
प्रदेश कैबिनेट द्वारा घुमंतू विकास बोर्ड के गठन के निर्णय के बाद गुरुवार को आयोजित आभार एवं अभिनंदन समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के संकल्प को सरकार समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का कार्य कर रही है। बिना किसी जाति, क्षेत्र, भाषा या अन्य भेदभाव के प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की दिशा में यह बोर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार वनटांगिया, मुसहर, थारू, गौड़, चेरो, बुक्सा, कोल और सहरिया जैसे वंचित समुदायों को पहली बार व्यापक स्तर पर सरकारी योजनाओं से जोड़ने में सफल रही है। इन समुदायों को राशन कार्ड, भूमि के पट्टे, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास, आयुष्मान भारत कार्ड, निःशुल्क बिजली व गैस कनेक्शन तथा विभिन्न पेंशन योजनाओं का लाभ दिया गया है। सरकार का लक्ष्य प्रत्येक पात्र व्यक्ति को सभी योजनाओं से शत-प्रतिशत आच्छादित करना है।
उन्होंने कहा कि सरकार के लिए जनता केवल वोट बैंक नहीं, बल्कि जनार्दन है। अनुसूचित जाति और जनजाति के बच्चों के लिए आश्रम पद्धति विद्यालय तथा श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए अटल आवासीय विद्यालय स्थापित किए गए हैं, जहां निःशुल्क शिक्षा, आवास और भोजन की व्यवस्था उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब किसी भी घुमंतू समुदाय को ‘क्रिमिनल ट्राइब’ नहीं कहा जा सकता। ये वे वीर समुदाय हैं जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया। घुमंतू विकास बोर्ड इन समुदायों की पहचान कर उन्हें शासन की सभी योजनाओं से जोड़ते हुए सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन उपलब्ध कराने का कार्य करेगा।
मुख्यमंत्री ने सपेरा समाज का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यह समुदाय प्राचीन काल से शिवावतारी गुरु श्री गोरखनाथ जी की परंपरा का अनुयायी रहा है। विदेशी आक्रमणों के समय जब संचार के आधुनिक साधन उपलब्ध नहीं थे, तब यही समाज भजन और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के माध्यम से लोगों को सचेत करता था तथा समाज को जागरूक बनाने का महत्वपूर्ण दायित्व निभाता था। आज भी यह समाज घुमंतू जीवन व्यतीत कर रहा है। राज्य सरकार इनके सम्मानजनक पुनर्वास तथा समग्र विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगी।