वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। शिया मुसलमानों में तीन तलाक को लेकर हो रही कानूनी कार्रवाई के विरोध में शिया संगठनों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। अफ़हाम-ए-ज़मा सोसाइटी की ओर से शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास को इस संबंध में एक ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में शिया समुदाय से जुड़े मामलों में तीन तलाक के नाम पर की जा रही कार्रवाई पर पुनर्विचार की मांग की गई है।
मौलाना यासूब अब्बास ने इस मौके पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि शिया शरीयत में तलाक की प्रक्रिया बिल्कुल स्पष्ट है और इसमें दो गवाहों की मौजूदगी अनिवार्य होती है। उन्होंने कहा कि कुछ मौलवी शरीयत को धंधा बना रहे हैं और पैसे लेकर बिना दोनों पक्षों की बात सुने तलाक या खुला के फ़ैसले सुना रहे हैं, जो पूरी तरह शरीयत के खिलाफ है। ऐसी गलत परंपराओं को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि शिया समुदाय की धार्मिक और सामाजिक मान्यताओं को समझे बिना की जा रही कानूनी कार्रवाई से भ्रम और असंतोष पैदा हो रहा है। इस पूरे मामले पर गंभीरता से विचार करने के लिए ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड जल्द ही एक अहम बैठक करेगा, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।