वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी) / अजय कुमार
लखनऊ। केंद्र सरकार द्वारा नए लेबर कोड्स को 22 नवंबर से लागू किए जाने के बाद देश की दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। हिन्द मजदूर सभा के प्रांतीय मंत्री अविनाश पांडे ने इसे मेहनतकशों के साथ “बड़ा धोखा” बताते हुए कहा कि सरकार ने 21 नवंबर को की गई अधिसूचना के जरिए लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को दरकिनार कर दिया है। उनका आरोप है कि चारों लेबर कोड्स भारत के कल्याणकारी राज्य की भावना को कमजोर करते हैं और श्रमिकों के अधिकारों पर सीधा हमला हैं।
संयुक्त मंच में शामिल INTUC, AITUC, HMS, CITU, AIUTUC, TUCC, SEWA, AICCTU, LPF, UTUC के साथ इफेज और कई स्वतंत्र औद्योगिक संगठनों ने भी इस फैसले का पुरजोर विरोध किया है। यूनियनों का कहना है कि 2019 में वेज कोड और 2020 में अन्य तीन कोड्स पारित होने के बाद से देशभर में लगातार आंदोलनों का क्रम जारी है, जिसकी परिणति कई बड़े हड़तालों में हुई, जिनमें 9 जुलाई 2025 की देशव्यापी हड़ताल भी शामिल है।
यूनियनों का आरोप है कि सरकार बिहार चुनावों में मिली जीत के बाद लेबर कोड्स को लागू करने में उतावली दिख रही है, जबकि श्रम सम्मेलन बुलाने और कोड्स वापस लेने की मांग लगातार अनसुनी की जा रही है। संयुक्त मंच ने 26 नवंबर को व्यापक प्रतिरोध और अस्वीकृति के लिए देशभर में आंदोलन का आह्वान किया है।