वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप प्रदेश में स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों को पर्यटन से जोड़कर नई पहचान देने की कवायद तेज हो गई है। पर्यटन विभाग की ओर से ‘स्वतंत्रता संग्राम सर्किट’ के तहत उन स्थानों का विकास कराया जा रहा है, जहां आजादी के आंदोलन की महत्वपूर्ण घटनाएं हुईं और वीर सेनानियों ने देश के लिए संघर्ष किया। उद्देश्य नई पीढ़ी को स्वतंत्रता की गौरवगाथा से जोड़ने के साथ इन स्थलों को आकर्षक पर्यटन केंद्र बनाना है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार सरकार आजादी की विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने को प्राथमिकता दे रही है। ऐतिहासिक स्थलों पर बेहतर कनेक्टिविटी, वे-फाइंडिंग, सौंदर्यीकरण, पर्यटक सुविधाओं और इतिहास की जानकारी देने वाले व्याख्या केंद्र विकसित किए जा रहे हैं, ताकि पर्यटक इन स्थलों के इतिहास को करीब से समझ सकें।
वाराणसी के पिंडरा क्षेत्र के करखियांव गांव में स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े स्थल के विकास के लिए 18.26 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। यहां शहीद हुए 26 लोगों की स्मृति में म्यूरल पार्क बनाया जा रहा है। रायबरेली के ऊंचाहार क्षेत्र स्थित मुंशीगंज शहीद स्मारक का 4.51 करोड़ रुपये से विकास कराया जा रहा है, जिसका करीब 85 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
लखनऊ के उमरिया मजरे मुसपिपरी गांव में अमर शहीद राजा दिग्विजय सिंह स्मारक के विकास के लिए करीब एक करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। औरैया में ककोर स्थित तिरंगा पार्क को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। बलिया में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जन्मस्थली और मंगल पांडेय से जुड़े स्मारक स्थल का विकास कराया गया है। बांसडीह में वीर कुंवर सिंह के नाम पर शहीद स्मारक भी विकसित किया गया है।
शाहजहांपुर के जसवंतपुर में शहीद करतम सिंह पार्क का निर्माण और सौंदर्यीकरण 79 लाख रुपये से कराया गया है। हरदोई के सेमरिया स्थित शहीद स्थल का 41 लाख रुपये से पर्यटन विकास हुआ है। मेरठ में 1857 की क्रांति से जुड़े प्रमुख स्थलों और शहीद स्मारक के विकास पर 4.53 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इन परियोजनाओं से इतिहास, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।