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कला अभिरुचि पाठ्यक्रम से नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ने की पहल

वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग की पहल पर राज्य संग्रहालय लखनऊ में 18 से 28 फरवरी तक आयोजित ‘कला अभिरुचि पाठ्यक्रम’ का भव्य शुभारम्भ संग्रहालय सभागार में हुआ। इस 10 दिवसीय कार्यक्रम में देशभर के विद्वान भारतीय कला, इतिहास और संग्रहालय अध्ययन के विविध आयामों पर व्याख्यान देंगे। उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. माण्डवी सिंह, मुख्य वक्ता प्रो. के.के. थप्पल्याल तथा विशिष्ट अतिथियों में संजय कुमार बिसवाल और डॉ. सृष्टि धवन उपस्थित रहे।
प्रो. माण्डवी सिंह ने कहा कि कला और संस्कृति से जुड़े ऐसे कार्यक्रम समाज में रचनात्मक चेतना को सशक्त करते हैं तथा आमजन को अपनी विरासत से जोड़ने का माध्यम बनते हैं। मुख्य वक्ता प्रो. के.के. थप्पल्याल ने कला के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानव सभ्यता के विकास में कला की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और प्रागैतिहासिक काल से ही मनुष्य कला सृजन करता आया है। उन्होंने दर्शकों में कला के प्रति संवेदनशीलता और समझ विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों, शोधार्थियों और कला प्रेमियों के लिए उपयोगी होगा। उन्होंने कहा कि सरल भाषा में कला और संग्रहालय की जानकारी देकर नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ा जाएगा। कार्यक्रम के तहत 19 से 27 फरवरी तक विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान देंगे, जिनमें प्राचीन कला का विकास, गुप्तकालीन कला, संग्रहालयों का महत्व, भारतीय मुद्राओं का इतिहास, प्रागैतिहासिक संस्कृतियां, वास्तुकला और संग्रहालय संरक्षण जैसे विषय शामिल हैं। 28 फरवरी को प्रमाण-पत्र वितरण के साथ पाठ्यक्रम का समापन होगा। आयोजकों का मानना है कि यह पहल कला जागरूकता को नई दिशा देगी।

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