वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
सुपौल (बिहार)। गौमाता के प्राणों की रक्षा और उन्हें राष्ट्रमाता घोषित कराने हेतु चल रहे राष्ट्रव्यापी धर्मांदोलन के तहत बिहार में गौमतदाता संकल्प यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में आज सुपौल में आयोजित एक कार्यक्रम में परमाराध्य परमधर्माधीश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने सनातनधर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि गोत्र ही हिंदुओं की असली पहचान है, जिसे आज लोग भूलते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अपने गोत्र और उसके महत्व को याद रखना प्रत्येक सनातनधर्मी का परम कर्तव्य है।
कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने के लिए शंकराचार्य को उनके प्रवास स्थल से भारी संख्या में उपस्थित गौभक्तों और बिहारवासियों ने पालकी में आरूढ़ कराकर भव्य शोभायात्रा के रूप में लाया। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने गौमाता के महात्म्य का उल्लेख करते हुए कहा कि 33 कोटि देवी-देवताओं की आश्रय स्थली गौमाता का महत्व इसी से समझा जा सकता है कि हमारे जीवन में गुरु और ईश्वर जितने पूजनीय हैं, उतनी ही श्रद्धा से हम अपने घर में पहली रोटी गौमाता के लिए निकालते हैं। उन्होंने कहा कि गौमाता की रक्षा हेतु भगवान नारायण हर युग में अवतार लेते हैं, इसलिए अब यह भारत भूमि गौवध को किसी भी कीमत पर सहन नहीं करेगी।
उन्होंने कहा कि हम लोग पिछले 78 वर्षों से नेताओं पर भरोसा करते रहे, लेकिन उन्होंने गोकशी रोकने के बजाय अपने निहित स्वार्थ के लिए इसे बढ़ावा दिया। अब समय आ गया है कि हम गौमाता के प्राणों की रक्षा के लिए मतदान करें ताकि गौमाता की रक्षा हो सके और हम गोकशी के पाप से बच सकें। इस दौरान उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय को दाहिना हाथ उठाकर गौमाता की रक्षा हेतु मतदान का संकल्प भी दिलाया।
कार्यक्रम के पश्चात शंकराचार्य जी महाराज फारबिसगंज के लिए रवाना हुए, जहां मार्ग में अनेक स्थानों पर भक्तों ने पुष्पवर्षा और जयकारों से उनका स्वागत किया। कई स्थानों पर भक्तों ने उनके चरण पादुका का पूजन कर आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर प्रत्यक्चैतन्यमुकुंदानंद गिरी जी महाराज, स्वामी दिव्यानंद सागर जी, देवेंद्र पांडेय, राजीव झा, रामकुमार झा और शैलेन्द्र योगी जी ने भी लोगों को संबोधित किया। शंकराचार्य जी महाराज आज फारबिसगंज में विश्राम करेंगे। यह जानकारी उनके मीडिया प्रभारी संजय पांडेय द्वारा दी गई।