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“न पढ़ूंगा, न पढ़ने दूंगा” की राह पर उत्तर प्रदेश सरकार

वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। लोकदल के अध्यक्ष सुनील सिंह ने कहा है, कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा राज्यभर में 5000 से अधिक विद्यालयों को बंद करने की योजना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह शिक्षा विरोधी मानसिकता को दर्शाता है। शिक्षा को संविधान में मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी गई है, लेकिन सरकार का यह कदम गरीब, ग्रामीण और पिछड़े वर्गों के बच्चों को शिक्षा से वंचित करने वाला साबित होगा। सरकार के इस फैसले से हजारों शिक्षकों की नौकरी पर भी संकट मंडरा रहा है। यह निर्णय दर्शाता है कि सरकार की प्राथमिकता में शिक्षा, बच्चों का भविष्य और शिक्षक नहीं, बल्कि बजट कटौती और निजीकरण है।
लोकदल की मांग:
1. सरकार तत्काल 5000 स्कूलों को बंद करने की योजना को वापस ले।
2. सभी विद्यालयों में मूलभूत सुविधाएं जैसे शिक्षक, शौचालय, पुस्तकालय और स्मार्ट क्लास की व्यवस्था की जाए।
3. शिक्षा के क्षेत्र में निजीकरण की जगह सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली को मजबूत किया जाए।
लोकदल इस मुद्दे को लेकर सड़क से लेकर विधानसभा तक संघर्ष करेगा और उत्तर प्रदेश की जनता के बच्चों के भविष्य को अंधकार में जाने नहीं देगा।
“शिक्षा का हक़, हर बच्चे को हक़” – यह हमारा वादा है।

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