वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। प्रदेश में पैक्ड पेयजल और मिनरल वाटर की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने सख्त कदम उठाया है। अब नई पैक्ड पानी इकाइयों को बीआईएस प्रमाणन मिलने के बाद ही लाइसेंस या पंजीकरण दिया जाएगा। वहीं, पहले से संचालित सभी 968 इकाइयों को 31 मार्च 2027 तक प्रमाणन लेना अनिवार्य होगा। तय समय में प्रमाणन नहीं मिलने पर लाइसेंस निलंबित रहेगा और उत्पादन बंद करना होगा।
एफएसडीए की जांच में पैक्ड पानी की गुणवत्ता को लेकर गंभीर खामियां सामने आई हैं। पिछले एक साल में 811 इकाइयों का निरीक्षण किया गया। इस दौरान लिए गए 660 नमूनों में 176 असुरक्षित और 337 अधोमानक पाए गए। इस तरह कुल 513 नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। असुरक्षित नमूनों में ई-कोलाई, कोलीफार्म बैक्टीरिया, यीस्ट और मोल्ड की मौजूदगी मिली। कई इकाइयों में फिल्टर, यूवी ट्रीटमेंट, ओजोनीकरण, साफ-सफाई और पानी के स्रोत की जांच में भी कमियां मिलीं। इन अनियमितताओं पर कार्रवाई करते हुए 152 इकाइयों के लाइसेंस या पंजीकरण निलंबित कर उत्पादन बंद कराया गया। वहीं, केंद्रीय लाइसेंस वाली 55 इकाइयों के लाइसेंस निलंबित करने की संस्तुति की गई।
दरअसल, एफएसएसएआई ने 18 अक्टूबर 2024 से पैक्ड पेयजल के लिए आईएसआई/बीआईएस प्रमाणन की अनिवार्यता हटा दी थी। इसके बाद प्रदेश में इकाइयों की संख्या बढ़ी। जांच में गुणवत्ता संबंधी गंभीर खामियां मिलने के बाद यूपी एफएसडीए ने प्रमाणन दोबारा अनिवार्य करने का फैसला किया है। एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब का यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इसके दायरे में केंद्रीय लाइसेंस वाली इकाइयां भी आएंगी।