वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से नौवें डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम स्मृति व्याख्यान एवं फैकल्टी डेवलपमेंट वर्कशॉप का आयोजन किया गया। कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद के संरक्षण में आयोजित कार्यक्रम में चिकित्सा शिक्षकों को नेतृत्व क्षमता, आत्म-जागरूकता और प्रभावी शिक्षण पद्धतियों के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता एरा लखनऊ मेडिकल कॉलेज की जैव रसायन एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रोफेसर प्रो. सुचेता पी. डांडेकर रहीं। वह मणिपाल एकेडमी ऑफ हेल्थ एजुकेशन में एडजंक्ट फैकल्टी भी हैं। इससे पहले वह मुंबई के सेठ जीएस मेडिकल कॉलेज एवं केईएम अस्पताल में जैव रसायन विभाग की प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष रह चुकी हैं।
कार्यक्रम के पहले सत्र में प्रो. डांडेकर ने ‘खुद को जानें, दूसरों का नेतृत्व करें और विवादों से निपटें’ विषय पर कार्यशाला आयोजित की। इसमें 60 संकाय सदस्यों ने हिस्सा लिया। संवाद और समूह गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों ने नेतृत्व कौशल, आत्म-जागरूकता और कार्यस्थल पर विवादों के प्रभावी प्रबंधन के व्यावहारिक तरीकों पर चर्चा की। दोपहर बाद ब्राउन हॉल में आयोजित स्मृति व्याख्यान में प्रो. डांडेकर ने ‘मंत्रों से अर्थ तक : चिकित्सा शिक्षा में प्रचलित मान्यताओं की पुनर्समीक्षा’ विषय पर विचार रखे। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा में स्थापित धारणाओं की आलोचनात्मक समीक्षा करने और शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, सार्थक एवं विद्यार्थियों के अनुकूल बनाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम का समन्वय चिकित्सा शिक्षा विभाग की अध्यक्ष प्रो. अमिता पांडेय, प्रो. सारिका गुप्ता और प्रो. रिदम ने किया। आयोजन के माध्यम से केजीएमयू ने गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा और शिक्षकों के कौशल विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।