वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ/मऊ। समाजवादी पार्टी सांसद राजीव राय द्वारा SIR (विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण) प्रक्रिया में 20 हजार मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों पर मऊ जिलाधिकारी प्रवीण मिश्रा ने तथ्यात्मक पलटवार करते हुए इन्हें स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। सांसद ने चुनाव आयोग को भेजी शिकायत में दावा किया था कि घोषी लोकसभा क्षेत्र में 20,000 नाम हटाए गए हैं और 664 पन्नों का रिकॉर्ड डीएम को सौंपा गया। लेकिन जिलाधिकारी ने सोशल मीडिया मंच X पर जवाब देते हुए कहा, “20 हजार वोटरों के नाम नहीं हटाए गए, आरोप निराधार और तथ्यों से परे हैं।”
डीएम मिश्रा ने स्पष्ट किया कि हटाने–जोड़ने संबंधी कार्य SIR का हिस्सा नहीं, बल्कि 356-मऊ विधानसभा सीट पर सितंबर 2025 में संभावित उपचुनाव की पूर्व तैयारी के तहत अलग कार्यवाही थी, जिसे अक्टूबर में ही राजनीतिक दलों को लिखित रूप में सूचित कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि SIR प्रक्रिया पूरी तरह निर्बाध, पारदर्शी और तय समयसीमा में चल रही है।
जिलाधिकारी के अनुसार कई बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) सर्वे, फॉर्म संग्रह और डिजिटाइजेशन का कार्य लगभग पूरा कर चुके हैं। मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद दावे-आपत्तियां ली जाएंगी और नियमानुसार निस्तारित की जाएंगी। डीएम ने दोहराया कि वर्तमान SIR चरण में किसी भी मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया गया और प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल निगरानी में सम्पन्न हो रही है। इस बयान के बाद मऊ से लेकर लखनऊ तक राजनीतिक गलियारों में तीखी बहस छिड़ गई है। साफ संकेत है कि इस बार नाम नहीं, बल्कि नैरेटिव स्क्रूटनी के दायरे में है।