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शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता बढ़ाये जाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी की अनूठी पहल

– जिलाधिकारी सूर्य पाल गंगवार की अध्यक्षता में परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 (NAS) परीक्षा के आयोजन को लेकर बैठक
वेब वार्ता ( न्यूज एजेंसी) / अजय कुमार वर्मा
लखनऊ। जिलाधिकारी सूर्य पाल गंगवार की अध्यक्षता में परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 (NAS) परीक्षा के आयोजन को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक कलेक्ट्रेट के डॉ0 ऐ0पी0जे0 अब्दुल कलाम सभागार में आयोजित की गई। बैठक में शिक्षा विभाग के संबंधित अधिकारियों ने भाग लिया। जिलाधिकारी ने परीक्षा की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने बताया कि शासन की मंशानुसार परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 (NAS) परीक्षा की तिथि 04 दिसंबर, 2024 को निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि यह एक राष्ट्रीय मूल्यांकन सर्वेक्षण है, जो भारत सरकार द्वारा छात्रों के शिक्षा स्तर और ज्ञान की गुणवत्ता को मापने के लिए आयोजित किया जाता है। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता, विद्यार्थियों की समझ और विभिन्न क्षेत्रों जैसे कि गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और भाषा में उनकी दक्षता को जानना होता है। इस सर्वेक्षण से प्राप्त डेटा का उपयोग राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा नीतियों में सुधार करने और शिक्षण प्रक्रियाओं में आवश्यक बदलाव लाने के लिए किया जाता है। उन्होंने निर्देशित किया कि सभी विद्यालयों में इस परीक्षा आयोजन को लेकर तैयारी शुरू कर दी जाए। इस संबंध में शासन द्वारा मॉडल पेपर एवं ओ0एम0आर0 प्रैक्टिस शीट उपलब्ध करा दी गई हैं जिन्हें स्कूलों में वितरित कर प्रत्येक शनिवार को बच्चों का टेस्ट लिया जाना सुनिश्चित किया जाये।
जिलाधिकारी ने जिले के सभी विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति सुधारने के लिए निर्देश दिये कि बच्चों को नियमित विद्यालय आने के लिए प्रेरित किया जाए ताकि उनकी उपस्थिति न्यूनतम 75 प्रतिशत हो सके। इस दिशा में शिक्षकों और विद्यालय प्रशासन को सक्रिय भूमिका निभाने के लिए निर्देशित किया गया। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे इस अभियान को प्रभावी रूप से लागू करें और नियमित रूप से उपस्थिति की निगरानी करें। इसके अतिरिक्त, माता-पिता को भी इस विषय में जागरूक किया जाए ताकि वे बच्चों को नियमित विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित हों। उपस्थिति बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि अच्छी उपस्थिति से बच्चों की पढ़ाई में निरंतरता बनी रहेगी और उनका शैक्षिक विकास अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा। अतः सभी विद्यालय इस दिशा में शीघ्र आवश्यक कदम उठाएं और सुनिश्चित करें कि छात्र नियमित रूप से विद्यालय आये।
जिले के सभी विद्यालयों में छात्रों में आत्म विश्वास और कौशल वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि विद्यालयों में शिक्षकों की अनुपस्थिति की स्थिति में बच्चों को मॉनिटर बनाया जाए और सहपाठियों को अध्यापन करने का अवसर प्रदान किया जाए। इस पहल का उद्देश्य बच्चों के आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और शिक्षण कौशल को बढ़ाना है। इससे बच्चे न केवल अपने साथी छात्रों को पढ़ाएंगे बल्कि अपने ज्ञान को भी मजबूत करेंगे। इस अनुभव से बच्चों जिम्मेदारियों को समझने में सक्षम होंगे।
जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि प्रत्येक कक्षा में क्लास मॉनिटर के साथ-साथ सब्जेक्ट मॉनिटर भी बनाये जाएं ताकि छात्रों के अनुशासन एवं शैक्षणिक गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जा सके। इसके अतिरिक्त, सभी कक्षाओं के लिए एक व्यवस्थित क्लास शेड्यूल तैयार करने के निर्देश दिए जिसमें हर पीरियड के साथ संबंधित शिक्षक का नाम और विषय की जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध रहे ताकि इस शेड्यूल से शिक्षण कार्य सुचारू रूप से संपन्न हो सके और छात्रों के लिए समय का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने निर्देशित किया कि सभी विषयों के लिए शिक्षकों द्वारा लेसन प्लान भी तैयार किए जाएं ताकि पढ़ाई में सुसंगठितता बनी रहे और शिक्षण प्रक्रिया छात्रों के अनुकूल हो सके। इसके साथ ही प्रत्येक कक्षा के लिए एक क्लास टीचर भी नियुक्त किया जाए, जो उस कक्षा के समस्त शैक्षणिक और सहशैक्षणिक गतिविधियों का समुचित प्रबंधन करे और छात्रों की शैक्षणिक प्रगति पर ध्यान रखे।

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