वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार वर्मा
वाराणसी। गोविंदानंद सरस्वती ने जगतगुरु शंकराचार्य ज्योतिष्पीठाधीश्वर ज्योतिर्मठ बदरिकाश्रम हिमालय स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज को मठाम्नायसेतु महानुशासनम् के अनुसार अयोग्य बताते हुए उनका समर्थन करने वाले काशी के विद्वानों को मठाम्नायसेतु महानुशासनम् पर शास्त्रार्थ करने के लिए चुनौती दी थी।
गोविंदानंद की चुनौती को स्वीकार करते हुए डॉ० पी० एन० मिश्र ‘मंडन मार्तंड” ने शास्त्रार्थ के लिए उन्हें तीन विकल्प दिया था। प्रथम विकल्प के अनुसार गोविंदानंद को श्री मिश्र जी से वाराणसी में शास्त्रार्थ करना था। परंतु गोविंदानंद सरस्वती द्वारा वाराणसी से प्रव्रजन कर जाने के कारण नामित निर्णायिका द्वारा गोविंदानंद को पराजित और डॉ० पी० एन० मिश्र ‘मंडन मार्तंड” को विजयी घोषित दिया गया था।
श्री मिश्र जी द्वारा पूर्व में दी गई शर्त के अनुसार 15.06.2024 को गोविंदानंद को शंकर मठ हावड़ा में उपस्थित होकर श्री मिश्र से शास्त्रार्थ करना था परंतु दिनभर की प्रतीक्षा के बाद भी गोविंदानंद नहीं आए। दूसरे दिन भी गोविंदानंद नहीं उपस्थित हुए। ऐसी स्थिति में निर्णायक डॉ० स्वामी प्रज्ञानानंद सरस्वती ने गोविंदानंद को पराजित और डॉ० पी० एन० मिश्र जी को विजेता घोषित किया।
गोविंदानंद को शास्त्रार्थ का तीसरा अवसर महाशक्तिपीठ अँजोराधाम, भदोही में 18 जुलाई 2024 को मिश्र जी ने दिया है जिसमें निर्णायक आचार्य किशोर कुणालय पूर्व कुलपति कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय दरभंगा बिहार , पूर्व प्रशासक सह कार्य पदाधिकारी एवं पूर्व अध्यक्ष बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद पटना, श्री महावीर मंदिर पटना के संचालक न्यास के सचिव तथा पूर्व आ.ई.जी. सी.आई.एस. एफ. होंगे। उस दिन भी शास्त्रार्थ हेतु उक्त स्थल पर न आने पर निर्णायक कुणाल गोविंदानंद सरस्वती को तीसरी बार पराजित घोषित कर देंगे।