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उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान द्वारा ‘‘संस्कृतस्य प्राचीनता, महत्ता एवं व्यापकता‘‘ विषय पर व्याख्यान गोष्ठी का आयोजन

वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार वर्मा
लखनऊ 29 अगस्त। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान द्वारा आज संस्कृत सप्ताह के अवसर पर संस्कृत प्रतिभा खोज योजना के अन्तर्गत संस्कृत गीत, संस्कृत सामान्य ज्ञान एवं संस्कृत वाचन प्रतियोगिता एवं ‘‘संस्कृतस्य प्राचीनता, महत्ता एवं व्यापकता‘‘ विषय पर व्याख्यान गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन निदेशक विनय श्रीवास्तव एवं मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्जवलन करते हुए सरस्वती प्रतिमा को मार्ल्यापण कर किया।
श्री श्रीवास्तव ने विभिन्न विद्यालयों से आये लगभग 250 छात्रों एवं उनके साथ आये अभिभावकोंध्अध्यापकों के साथ अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्कृत विश्व की सबसे प्राचीन एवं वैज्ञानिक भाषा है। संस्कृत हमारे कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के लिए अच्छा विकल्प है। संस्कृत सप्ताह मनाने का उद्देश्य यही है कि इस भाषा को और अधिक बढ़ावा मिले, इसे आम जनता के सामने लाया जाये, हमारी नयी पीढ़ी इस भाषा के बारे में जाने, और इसके बारे में ज्ञान प्राप्त करे। संस्कृत भाषा बहुत सुंदर भाषा है, ये कई सालों से हमारे समाज को समृद्ध बना रही है। संस्कृत भाषा भारतीय संस्कृति के विरासत का प्रतीक है।
संस्कृत प्रतिभा खोज उ0प्र0 संस्कृत संस्थान की अनूठी योजना है जिसका उद्देश्य पूरे प्रदेश की संस्क्ृत प्रतिभाओं को आगे बढ़ाना है। कार्यकम्र में निर्णायक एवं ‘‘संस्कृतस्य प्राचीनता, महत्ता एवं व्यापकता‘‘ विषय पर व्याख्यान गोष्ठी में वक्ता के रूप में आमंत्रित डॉ० पद्मनी नातू, डॉ० नेहा श्रीवास्तव, डॉ० शेषमणि शुक्ल, डॉ० भुवनेश्वरी भारद्वाज, डॉ० शिवानन्द मिश्र एवं डॉ० विपिन कुमार झा द्वारा अपने-अपने विचार व्यक्त किये गये।

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