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कुकरैल नाइट सफारी इण्डियन वेटलैण्ड, एरिड इण्डिया व अफ्रीकन वेटलैण्ड की थीम पर विकसित होगी

वेब वार्ता (न्यूज एजेंसी)/ अजय कुमार वर्मा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में तैयार हो रहा है देश को पहला नाइट सफारी। यह दुनिया की पांचवीं नाइट सफारी होगी।
नाइट सफारी में जानवरों को चिन्हित करने, यहां लाने व क्वारंटीन की प्रक्रिया प्रारम्भ करने के मुख्यमंत्री ने निर्देष दे दिए हैं। दी जाए। कुकरैल नाइट सफारी परियोजना के अंतर्गत ईको टूरिज्म जोन भी विकसित होगा। यहां क्वारंटीन सेंटर, वेटनरी हॉस्पिटल, पोस्ट ऑपरेशन व ऑपरेशन थियेटर की समुचित व्यवस्था होगी। यहां कैफेटेरिया, 7-डी थियेटर, ऑडिटोरियम, पार्किंग आदि की भी सुविधा होगी। एडवेंचर जोन के तहत सुपरमैन जिपलाइन, आर्चरी, जिप लाइन, बर्मा ब्रिज, पैडल बोट, स्काई रोलर, फाउण्टेन, किड्स एक्टिविटी के लिए जंगल एनिमल थीम, स्काई साइकिल आदि विकसित किये जाएंगे। डे सफारी का विस्तार दूसरे चरण में होगा।
     ज्ञात हो कि नाइट सफारी क्षेत्र में इण्डियन वॉकिंग ट्रे, इण्डियन फुटहिल, इण्डियन वेटलैण्ड, एरिड इण्डिया व अफ्रीकन वेटलैण्ड की थीम पर विकसित किए जाने वाले क्षेत्र मुख्य आकर्षण होंगे। पर्यटकों द्वारा नाइट सफारी पार्क के अवलोकन हेतु 5.5 किमी0 ट्रॉम-वे तथा 1.92 किमी0 का पाथ-वे निर्मित किया जाएगा। नाइट सफारी में मुख्यतः एशियाटिक लायन, घड़ियाल, बंगाल टाइगर, उड़न गिलहरी, तेंदुआ, हायना आदि मुख्य आकर्षण होंगे। कुकरैल नाइट सफारी परियोजना के अंतर्गत विश्व स्तरीय वन्य जीव चिकित्सालय व रेस्क्यू सेंटर का निर्माण भी प्रस्तावित है। कुकरैल वन क्षेत्र में स्थापित होने वाले जू में कुल 63 इनक्लोजर बनाए जाएंगे। जू में सारस क्रेन, स्वॉम्प डियर, हिमालयन भालू, साउथ अफ्रीकन जिराफ, अफ्रीकन लायन व चिंपैन्जी मुख्य आकर्षण होंगे। जू को अफ्रीकन सवाना, इनक्रेडिबल इण्डिया, इंजीनियर्ड वेटलैण्ड नामक थीम क्षेत्रों पर विकसित किया जाएगा। नाइट सफारी में 42 इनक्लोजर में 54 प्रजातियों के जानवरों को रखा जाएगा। सफारी की अधिकतम क्षमता 8 हजार व्यक्ति प्रति रात्रि होगी। पर्यटकों के सैर के लिए 5.5 किमी ट्राम-वे व 1.92 किमी का पाथ-वे बनेगा।
      वर्ष 1904 में प्रकाशित लखनऊ के गजेटियर के अनुसार कुकरैल महोना में अस्ती गांव के उत्तर से निकलती है। यह शहर के ठीक नीचे भीखमपुर के पास गोमती नदी में मिल जाती है। गजेटियर के अनुसार कुकरैल का पानी अपनी शुद्धता के लिए प्रसिद्ध हुआ करता था। बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में पर्यावरण विज्ञान के प्रोफेसर वेंकटेश दत्ता का कहना है कि गोमती के अस्तित्व के लिए अविरल निर्मल कुकरैल नदी आवश्यक है। क्योंकि यह गोमती की सहायक है। कुकरैल नदी मध्य लखनऊ शहर से गुजरते समय भारी मात्रा में पानी लाती रही है। 1962 में तटबंध के निर्माण से पहले, कुकरैल नदी बैराज के नीचे की ओर (जहां वर्तमान ताज होटल और अंबेडकर पार्क स्थित है) गोमती से मिलती थी। लेकिन तटबंध के निर्माण के बाद यह हिस्सा नदी की मुख्यधारा से कट गया। कुकरैल के रिपेरियन बफर को बांधों, नालों और अनियोजित शहरीकरण से काफी नुकसान हुआ है।

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