वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। दीपावली पर प्रदेश की गौशालाओं में गोबर से दीये, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां और अन्य पूजन सामग्री तैयार कराई जाएगी। इससे गौशालाओं की आय बढ़ाने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी विकसित किए जाएंगे। पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने बुधवार को विधान भवन स्थित कक्ष संख्या 80 में अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश दिए।
मंत्री ने कहा कि प्रदेश की सभी गौशालाओं में गौजन्य उत्पादों को प्रोत्साहित किया जाए। गोबर का उपयोग उपयोगी और पर्यावरण अनुकूल उत्पाद बनाने में करने से गौशालाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और प्राकृतिक संसाधनों के सदुपयोग के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ेगी।
महिलाओं और युवाओं को मिलेगा रोजगार :
धर्मपाल सिंह ने कहा कि गोबर आधारित उत्पादों के निर्माण में स्थानीय कारीगरों, महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। उत्पादों की गुणवत्ता, आकर्षक डिजाइन और बाजार में उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया जाए। स्थानीय मेलों में इन उत्पादों की बिक्री के लिए विशेष स्टाल लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि गोबर और मिट्टी से बने दीये तथा मूर्तियां भारतीय परंपरा के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देती हैं। गोबर से जैविक खाद और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार करके गौशालाओं की आय के स्रोत बढ़ाए जा सकते हैं।
पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने भी अधिकारियों को सभी जिलों की गौशालाओं में इस पहल को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने उत्पादों के प्रचार-प्रसार और विपणन की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया। सरकार का मानना है कि इस पहल से गोवंश की बेहतर देखभाल, गौशालाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार और ग्रामीण स्वरोजगार को बढ़ावा मिल सकता है।