वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
वाराणसी। सनातन धर्म, वेद-शास्त्रों और हिन्दू देवी-देवताओं के संबंध में रामपाल द्वारा कथित आपत्तिजनक प्रचार और शास्त्रीय तर्कों को लेकर वाराणसी के श्रीविद्यामठ, केदारघाट में 18 अक्टूबर को प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने रामपाल को किसी तटस्थ स्थान पर आमने-सामने शास्त्रार्थ करने की खुली चुनौती दी। साथ ही सनातन धर्म के पक्ष में शास्त्रीय खण्डन प्रस्तुत करने के लिए शिवांश नारायण द्विवेदी को अपना प्रतिनिधि नियुक्त करने की घोषणा की।
प्रेस वार्ता में रामपाल की पुस्तकों ‘ज्ञान गंगा’ और ‘जीने की राह’ में हिन्दू देवी-देवताओं, धार्मिक परम्पराओं तथा धर्मशास्त्रों को लेकर प्रस्तुत विचारों पर सवाल उठाए गए। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि वेद, पुराण और अन्य धार्मिक ग्रन्थों के प्रमाणों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे लोगों में अपने धर्म के प्रति भ्रम पैदा हो सकता है। हिन्दू पर्वों, धार्मिक प्रतीकों और वैदिक विवाह-संस्कार से जुड़े विचारों की भी समीक्षा की गई।
प्रेस वार्ता में रामपाल की पुस्तकों के प्रकाशन, मुद्रण, वितरण और मुद्रक के पते को लेकर भी सवाल उठाए गए। इसके अलावा लखनऊ में हुई कानूनी कार्रवाई, प्राथमिकी और न्यायालय में प्रस्तुत याचिकाओं से जुड़े घटनाक्रम की जानकारी दी गई। इस दौरान 18 प्रमुख बिन्दुओं पर आधारित विज्ञप्ति का भी उल्लेख किया गया।
‘रामपाल का रसातल गमन’ ग्रन्थ का विमोचन :
कार्यक्रम में शिवांश नारायण द्विवेदी द्वारा संकलित ‘रामपाल का रसातल गमन’ ग्रन्थ का विमोचन भी किया गया। आयोजकों के अनुसार, इस ग्रन्थ में सनातन धर्म और धर्मशास्त्रों पर रामपाल द्वारा लगाए गए आक्षेपों का शास्त्रीय प्रमाणों और तर्कों के आधार पर निराकरण करने का प्रयास किया गया है। शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि प्रेस वार्ता का उद्देश्य धार्मिक विषयों पर उठाए गए सवालों का शास्त्रसम्मत उत्तर समाज के सामने रखना है। उन्होंने धर्माचार्यों, विद्वानों और पत्रकारों से इस विषय पर उपलब्ध तथ्यों तथा शास्त्रीय प्रमाणों का अध्ययन कर चर्चा को आगे बढ़ाने की अपील की।