वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। मतदाता सूची से किसी का नाम हटवाने या उसमें संशोधन कराने के लिए फॉर्म-7 के जरिए गलत जानकारी देना भारी पड़ सकता है। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने स्पष्ट किया है कि जानबूझकर गलत सूचना देने या झूठी आपत्ति दर्ज कराने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर एक साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों सजाएं हो सकती हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को फॉर्म-7 के तहत प्राप्त आवेदनों पर भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा-31 के तहत मतदाता सूची तैयार करने या उसमें संशोधन के लिए जानबूझकर गलत जानकारी देना अपराध है।
नवदीप रिणवा के मुताबिक, फॉर्म-7 में आवेदक को निर्धारित घोषणा करनी होती है। यदि निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी की जांच में कोई आपत्ति गलत या मनगढ़ंत पाई जाती है तो संबंधित आवेदक के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। भारत निर्वाचन आयोग के नौ अक्टूबर 2026 के निर्देशों के अनुसार सभी अधिकारियों को आपत्तियों की जांच और निस्तारण नियमानुसार करने को कहा गया है।
निर्वाचन अधिकारियों को इन नियमों और कानूनी प्रावधानों का प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रचार करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि मतदाता सही जानकारी के साथ आवेदन करें।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि मतदाता सूची में छूटे पात्र नागरिकों और पहली बार मतदान के योग्य युवाओं के नाम जोड़ने के लिए प्रदेश के सभी मतदेय स्थलों पर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसमें महिलाओं और युवाओं के नाम जोड़ने पर विशेष जोर है। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे 24 अक्टूबर को अपने बूथ की मतदाता सूची में अपना और परिवार के सदस्यों का नाम जरूर जांचें। नाम नहीं होने पर फॉर्म-6 भरकर बीएलओ को दें। इसके अलावा voters.eci.gov.in पोर्टल और ECINET मोबाइल ऐप से भी आवेदन किया जा सकता है।