वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
झांसी। बेटे की परेशानी को अवसर में बदलकर एक मां ने उद्यमिता की नई मिसाल पेश की है। कॉलेज में पढ़ाई के दौरान बेटे आर्यमन को हॉस्टल तलाशने में हुई दिक्कत से जन्मा विचार आज ‘हॉस्टल्स नियर मी’ स्टार्टअप बन चुका है। इसकी मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) अनुराधा मेहरोत्रा ने बेटे के साथ मिलकर इस पहल को आगे बढ़ाया। योगी सरकार की ‘स्टार्ट इन यूपी’ योजना के तहत स्टार्टअप के लिए 10 लाख रुपये की ग्रांट स्वीकृत हुई है। इसकी पहली किस्त भी मिल चुकी है।
अनजान शहर में भरोसेमंद हॉस्टल तलाशना विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के लिए बड़ी चुनौती होती है। आर्यमन ने अपनी इसी परेशानी का समाधान खोजने का विचार मां के साथ साझा किया। अनुराधा ने बेटे के आइडिया को प्रोत्साहित किया और उसे कारोबारी स्वरूप देने में सक्रिय भूमिका निभाई। आज वह स्टार्टअप के संचालन और विस्तार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के इनक्यूबेशन सेंटर से जुड़ा यह स्टार्टअप वर्ष 2024 में कंपनी के रूप में पंजीकृत हुआ। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए हॉस्टल तलाशने में मदद करना है, ताकि उन्हें रहने के लिए उपयुक्त विकल्प खोजने में कम परेशानी हो।
‘हॉस्टल्स नियर मी’ का इस्तेमाल झांसी के अलावा लखनऊ, जयपुर, ग्वालियर, इंदौर और मेरठ जैसे शहरों में भी विद्यार्थी कर रहे हैं। फिलहाल यह सुविधा वेबसाइट के माध्यम से उपलब्ध है। स्टार्टअप को मिली ग्रांट से प्लेटफॉर्म में नए फीचर जोड़ने और मोबाइल एप विकसित करने की तैयारी है। वर्ष 2025 में स्वीकृत ग्रांट को स्टार्टअप के विस्तार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। नवरात्र के दौरान अनुराधा की यह पहल महिला नेतृत्व और आत्मनिर्भरता का उदाहरण बनकर सामने आई है। मां-बेटे की इस कोशिश ने साबित किया है कि परिवार की छोटी-सी समस्या का व्यावहारिक समाधान भी रोजगार और उद्यमिता की नई राह खोल सकता है।