वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए मिशन शक्ति फेज-6.0 के तहत व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। शारदीय नवरात्र में 11 से 20 अक्टूबर तक संचालित इस अभियान में महिला कल्याण विभाग 15 प्रमुख गतिविधियों के माध्यम से जागरूकता फैला रहा है। शुरुआती दिनों में रैलियों और पदयात्राओं में 50 हजार से अधिक लोगों ने भागीदारी की, जबकि वित्तीय साक्षरता गतिविधियों से 1,18,657 बालिकाएं जुड़ी हैं।
महिला कल्याण एवं बाल विकास पुष्टाहार विभाग की अपर मुख्य सचिव लीना जौहरी ने बताया कि प्रदेश के सभी 75 जिलों में महिलाओं और बालिकाओं को अधिकारों, सुरक्षा उपायों और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। कई जिलों में बेटियों को एक दिन का जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी बनाकर नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर दिया जा रहा है।
साइबर सुरक्षा से बाल विवाह रोकने तक अभियान :
अभियान में साइबर अपराध, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन धोखाधड़ी, पॉक्सो अधिनियम और बाल सुरक्षा के प्रति जागरूकता पर जोर है। कार्यस्थलों पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न की रोकथाम के लिए पॉश अधिनियम-2013 की जानकारी दी जा रही है। इसके साथ बाल विवाह और दहेज उन्मूलन, किशोरी स्वास्थ्य, माहवारी स्वच्छता, कन्या जन्मोत्सव और यातायात सुरक्षा से जुड़ी गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं।
सरकारी योजनाओं से जोड़ने की पहल :
विभाग की टीमें महिलाओं को मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना और निराश्रित महिला पेंशन योजना की जानकारी दे रही हैं। वित्तीय साक्षरता कार्यक्रमों के जरिए बालिकाओं को आर्थिक प्रबंधन की समझ दी जा रही है।
लीना जौहरी ने कहा कि महिलाओं को सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ना विभाग की प्राथमिकता है। अभियान के तहत जरूरतमंद महिलाओं को आश्रय गृहों, सखी निवास और आपातकालीन हेल्पलाइन की जानकारी भी दी जा रही है, ताकि संकट के समय उन्हें सहायता मिल सके।