वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देने के लिए निवेश प्रस्तावों पर अहम निर्णय लिए गए हैं। 13 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन पोर्टल पर मिले 38 आवेदनों में से 22 नए प्रस्तावों को मूल्यांकन समिति के सामने रखा गया। इनमें 19 प्रस्तावों पर सहमति दी गई, जबकि तीन को आगे की कार्रवाई के लिए स्थगित किया गया। सरकार का जोर कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन कर किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर है।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ किसानों की आय बढ़ाने और युवाओं को रोजगार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने अधिकारियों को उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के तहत उपलब्ध प्रोत्साहनों, अनुदान और निवेश सुविधाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। उन्होंने सौर ऊर्जा आधारित औद्योगिक मॉडल को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया।
अपर मुख्य सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण बीएल मीणा की अध्यक्षता में निदेशालय में हुई बैठक में निवेश प्रस्तावों की समीक्षा की गई। सहमति वाले प्रस्तावों में बेकरी उत्पाद, फिश फीड, फल-सब्जियों के निर्जलीकरण, पोल्ट्री फीड, काजू प्रसंस्करण, सोया चंक, पास्ता निर्माण, रेफ्रिजरेटेड वाहन और सौर ऊर्जा संयंत्र से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।
बैठक में अग्रूना इंडस्ट्रीज के निदेशक अक्षत करवा और फार्मी फूड के निवेश प्रस्तावों का भी विशेष उल्लेख किया गया। समिति ने कुछ परियोजनाओं को निर्धारित शर्तों और आवश्यक दस्तावेजों के अनुपालन के साथ सहमति दी। तीन प्रस्तावों में से दो को मशीनरी की उपयुक्तता और मानकों के परीक्षण के लिए स्थगित किया गया, जबकि एक प्रस्ताव वापस लेने की प्रक्रिया स्वीकार की गई। सरकार को उम्मीद है कि नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से कृषि आधारित उद्योगों में निवेश बढ़ेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।