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स्वास्थ्य से खेती तक माइक्रोबायोम तकनीक का सहारा लेगी योगी सरकार, तैयार हुआ प्लान

वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने, नदियों के प्रदूषण पर नियंत्रण और खेती को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए योगी सरकार ने माइक्रोबायोम तकनीक पर आधारित कार्ययोजना का ड्राफ्ट तैयार किया है। इसके तहत अस्पतालों में संक्रमण की निगरानी, रोगाणुरोधी दवाओं के प्रति सूक्ष्मजीवों की प्रतिरोधक क्षमता की पहचान, अपशिष्ट जल के उपचार और फसलों की गुणवत्ता सुधारने पर जोर दिया जाएगा। शुरुआत प्रदेश के चुनिंदा संस्थानों में पायलट परियोजनाओं से होगी।
‘उत्तर प्रदेश स्टेट स्पेसिफिक नोट ऑन माइक्रोबायोम टेक्नोलॉजीज’ नाम से तैयार ड्राफ्ट को जल्द मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी है। उत्तर प्रदेश प्रमोट फार्मा काउंसिल की सीईओ कृतिका शर्मा के मुताबिक, इस पहल में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, कृषि, उद्यान, नगर विकास, जल एवं स्वच्छता तथा प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े विभागों का सहयोग लिया जाएगा। लखनऊ स्थित बायोटेक्नोलॉजी पार्क और उत्तर प्रदेश प्रमोट फार्मा काउंसिल की भी इसमें अहम भूमिका होगी।
पहले तीन महीनों में प्रयोगशालाओं की क्षमता का आकलन, विभागों से परामर्श और पायलट स्थलों का चयन किया जाएगा। चौथे से बारहवें महीने तक अस्पतालों में संक्रमण की निगरानी, अपशिष्ट जल परीक्षण और कृषि संबंधी परियोजनाओं पर काम होगा। अगले चरण में 24 महीने तक परिणामों का मूल्यांकन कर सफल प्रयोगों का विस्तार किया जाएगा।

गंगा-यमुना की सफाई और खेती पर भी फोकस :
विशेषज्ञ डॉ. जीएन सिंह के सुझावों के मुताबिक, अस्पतालों में पारंपरिक जांच के साथ जरूरत के अनुसार आनुवंशिक परीक्षण और डीएनए सीक्वेंसिंग का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे संक्रमण फैलने के कारणों और दवाओं के प्रति प्रतिरोध की पहचान में मदद मिलेगी। गंगा, यमुना और गोमती के जलग्रहण क्षेत्रों में अपशिष्ट जल के जैविक उपचार को प्रभावी बनाने के लिए भी पायलट परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। कृषि क्षेत्र में मिट्टी के उपयोगी सूक्ष्मजीवों की भूमिका समझकर फसलों की गुणवत्ता सुधारने और नुकसान कम करने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। माइक्रोबायोम सूक्ष्मजीवों के ऐसे समुदाय को कहते हैं, जिनमें बैक्टीरिया और फंगस जैसे जीव शामिल होते हैं। ये मानव स्वास्थ्य, मिट्टी की उर्वरता और जैविक अपशिष्ट के विघटन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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