वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
वाराणसी। शारदीय नवरात्र के अंतिम दिन विजयादशमी पर श्रीविद्या साधना शिविर का भावपूर्ण वातावरण में समापन हुआ। इस अवसर पर ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने भगवती का विशेष शाटिकार्चन किया। ललिता त्रिशती के 300 नाम-मंत्रों का उच्चारण करते हुए माता को 300 साड़ियां अर्पित की गईं। पूजन की सभी विधियां शंकराचार्य ने स्वयं अपने कर-कमलों से संपन्न कीं।
शिविर के दौरान प्रतिदिन नवचंडी का भव्य अनुष्ठान आयोजित किया गया। आचार्य वीरेश्वर दातार के आचार्यत्व में हुए इस अनुष्ठान में बड़ी संख्या में साधकों और श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आध्यात्मिक उत्थान मंडल की माताओं ने नित्यार्चन का दायित्व पूरी निष्ठा और भक्तिभाव से निभाया। कार्यक्रम में कलश पूजन ब्रह्मचारी परमात्मानंद ने संपन्न कराया, जबकि आयोजन का संयोजन ब्रह्मचारी प्रभु प्रभूतानंद ने किया।
देशभर से पहुंचे साधक :
श्रीविद्या साधना शिविर में भाग लेने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से साधक और श्रद्धालु पहुंचे थे। कई दिनों तक चले साधना और पूजन के कार्यक्रमों के समापन पर साधक भावुक नजर आए। शिविर से विदा लेते समय श्रद्धालुओं ने शंकराचार्य से आशीर्वाद प्राप्त किया। पूजन के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उपस्थित साधकों और भक्तों को साड़ी तथा यवांकुर का प्रसाद वितरित किया। उन्होंने सभी को आशीर्वाद प्रदान किया। विजयादशमी के पावन अवसर पर आयोजित इस विशेष पूजा के साथ श्रीविद्या साधना शिविर का समापन हुआ। आयोजन में मंत्रोच्चार, पूजन और भक्ति के बीच पूरा वातावरण आध्यात्मिक रंग में सराबोर रहा।