वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
प्रतापगढ़। विजयदशमी के अवसर पर कुंडा विधायक और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने बेंती राजभवन में पारंपरिक शस्त्र पूजन किया। धोती-कुर्ता और केसरिया साफा पहने राजा भैया ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान राजभवन के मुख्य हॉल में 500 से अधिक छोटे-बड़े देशी और विदेशी हथियार सजाए जाने की बात सामने आई। शस्त्र पूजन के बाद राजा भैया के एक बयान ने भी लोगों का ध्यान खींचा।
राजभवन में पुरोहितों और वैदिक आचार्यों की मौजूदगी में अनुष्ठान संपन्न हुआ। हनुमान जी की प्रतिमा के सामने सजाए गए हथियारों पर राजा भैया ने तिलक लगाया, पुष्प अर्पित किए और आरती की। विजयदशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा को शक्ति, साहस और कर्तव्य के प्रति सजगता का प्रतीक माना जाता है। राजा भैया हर साल इस अवसर पर पारंपरिक रूप से शस्त्र पूजन करते हैं। पूजा के बाद राजा भैया ने कहा, “ये ना जानो इतने ही हैं… हाथी के दांत दिखाने के अलग होते हैं, खाने के अलग होते हैं।” उनके इस बयान पर मौके पर मौजूद लोगों ने तालियां बजाईं। पिछले साल हथियारों को लेकर हुए विवाद की पृष्ठभूमि में उनकी इस टिप्पणी को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, बयान के संदर्भ को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
दरअसल, पिछले साल राजा भैया की पत्नी रानी भानवी सिंह ने हथियारों को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद राजा भैया के हथियारों और शस्त्र पूजन को लेकर सार्वजनिक चर्चा हुई थी।
वहीं, पिछले साल राजा भैया की ओर से यह पक्ष रखा गया था कि पूजन में शामिल हथियार उनके परिवार, सुरक्षाकर्मियों और समर्थकों से संबंधित हैं और उनके पास वैध लाइसेंस हैं। इस बार विजयदशमी पर आयोजित शस्त्र पूजन और राजा भैया के बयान के बाद यह आयोजन एक बार फिर चर्चा में आ गया है।