वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। आकाशीय बिजली गिरने से होने वाली जनहानि रोकने के लिए योगी सरकार प्रदेश के पांच जिलों में आधुनिक सेंसर स्थापित करा रही है। भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम), पुणे के सहयोग से एटा, मेरठ, बलरामपुर, लखीमपुर खीरी और सोनभद्र में यह व्यवस्था विकसित की जा रही है। सेंसर से आकाशीय बिजली की गतिविधियों का पता लगाने और समय रहते चेतावनी जारी करने में मदद मिलेगी। इससे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने का समय मिल सकेगा।
राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक, इस पहल का मकसद प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली जनहानि कम करना और आपदा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है। खासकर बारिश के मौसम में खेतों में काम करने वाले किसानों, मजदूरों, ग्रामीणों और पशुपालकों को आकाशीय बिजली से सबसे अधिक खतरा रहता है। समय पर अलर्ट मिलने से इन लोगों को सतर्क करने के साथ स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां भी बचाव के जरूरी कदम उठा सकेंगी।
सोनभद्र के 32 गांवों में बनेगी विशेष व्यवस्था :
सोनभद्र जिले में आकाशीय बिजली से बचाव के लिए विशेष परियोजना पर काम किया जा रहा है। दुद्धी ब्लॉक के 32 गांवों में 1.33 करोड़ रुपये की लागत से लाइटनिंग डिटेक्शन एंड अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य जोखिम वाले इलाकों में रहने वाले लोगों तक समय रहते चेतावनी पहुंचाना है, जिससे बिजली गिरने की आशंका के दौरान वे सुरक्षित स्थानों पर जा सकें।
तकनीक से आपदा प्रबंधन होगा मजबूत :
सरकार की रणनीति में आपदा आने के बाद राहत पहुंचाने के साथ खतरे का पहले पता लगाने और नुकसान रोकने पर भी जोर दिया जा रहा है। आकाशीय बिजली का पता लगाने वाले सेंसर मौसम संबंधी गतिविधियों की निगरानी बेहतर बनाने में सहायक होंगे। हालांकि, जनहानि रोकने के लिए तकनीकी चेतावनी के साथ लोगों में जागरूकता और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई भी जरूरी होगी।